पठनीय है मनीषा सहाय ‘सुमन’ का लघुकथा संग्रह ‘बूंद-बूंद जिंदगी’

हिंदी में लघुकथा लेखन एक स्थापित विधा के रूप में स्वीकार हो चुकी है. पटना के डॉ. सतीशराज पुष्करणा सरीखे कई लेखकों ने तो पूरी जिंदगी लगा दी इस विधा को एक संयत निश्चित रूप देने में. सुकेश साहनी तो कई दशकों से अलग लघुकथा की पत्रिका ही निकाल रहे हैं . पेशे से सामाजिक कार्यकर्ता, संपादक, कवयित्री और कथा लेखिका मनीषा सहाय ' एक बहुत ऊर्जावान लेखिका हैं. एक कथा संग्रह और एक कहानी संग्रह के बाद हिंदी में मनीषा जी की यह पहली लघुकथा संग्रह है. 94 पृष्ठ के इस संग्रह में 72 लघु कथाएं हैं. सभी कथाएं लघुकथा के पैमाने पर फिट बैठती दिख रही हैं। प्रायः कोई भी कथा डेढ़ - दो सौ शब्दों से अधिक की नहीं हैं.

पुस्तक के आवरण का अंश
Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: April 29, 2026 10:50 pm

कथाएं एक पल को देखने, समझने और घटनाक्रम को गंभीरता से समेटने का प्रयास हैं और लेखिका अपने प्रयास में लगभग सफल रही हैं. कथाओं में निरर्थक पात्र, शब्द और प्लॉट को लाने से परहेज किया गया है. ये तो कहा ही जा सकता है कि कुछ लघुकथाओं में एक दीर्घ कथा,/उपन्यास के बीज भी छिपे हैं. प्रशंसा की पात्र हैं मनीषा कि उन्होंने ऐसी कथाओं में अनावश्यक विस्तार से परहेज किया ! कहते हैं कि अंग्रेजी के महान कवि, नाटककार शेक्सपियर के चर्चित “सोनेट ” में उनके नाटकों का थीम छुपा हुआ था. कदाचित मनीषा जी की लघुकथाओं में भी बहुत सारी बड़ी कहानियों/उपन्यासों का कथानक छिपा हो !

72 लघुकथाओं के इस संग्रह के प्रारंभ में कई प्रतिष्ठित लेखिकाओं ने अपने उद्गार व्यक्त किए हैं: झारखंड की प्रतिष्ठित लेखिका अनिता रश्मि ने अपनी भूमिका ‘ उद्वेलित करतीं हृदयस्पर्शी लघुकथाएं ‘ में कहती हैं ” लघुकथा में लघुता के बावजूद कथा तत्व, कथा रस तीक्ष्णता आवश्यक है। हाँ, मनीषा सहाय जी की कुछ रचनाओं में लघुकथा के प्रचलित तत्व नहीं हैं। सब में कथात्मकता भी होती तो सोने में सुहागा होता।” अनिताजी आगे लिखती हैं “जहां लघुकथाकार बात खत्म करता है, वहीं से पाठक के लिए बात शुरू होती है। इस मायने में मनीषा जी की लघुकथाओं में उद्वेलन की क्षमता है, ये पाठकों की ठहरकर सोचने को विवश करती हैं । यही इस संग्रह की सफलता है।”

संग्रह के कुछ कहानियों के शीर्षक से आपको कहानियों के विस्तृत क्षेत्र का अनुमान हो जाएगा .कुछ शीर्षक देखें: दो बूंद इश्क, कब्र की वासना, शिकायत, विरक्त कोख, अनुत्तरित, बेटी का मान, नीली आँखें, रोज डे, नया संसार सीढ़ियां, लिव इन, पहराव, कमी क्या रह गई त्रियाचरित्र, तलाक, हाउस मेकर कमाई, अछूत, ओवरटेक कबाड़, चेहरा, एक चुटकी सिंदूर इत्यादि.

जीवन में हर पल घटी घटनाओं के उस एक पल को मनीषा ने अपने शब्दों में समेटा है . हिंदी उपन्यासकार डॉ प्रतिमा त्रिपाठी इस संग्रह के बारे में कहती हैं :” इस संग्रह की विशेषता इसकी वैचारिक गहराई और यथार्थपरक दृष्टि है।प्रत्येक कथा मानवीय संबंधों स्त्री-अस्मिता,सामाजिक पाखंड आर्थिक विषमता और मानसिक संघर्षों को बेहद बारीकी से उद्घाटित करती है।ये कथाएं न तो उपदेश देती हैं और न ही नाटकीय बनावटीपन का सहारा लेती हैं। बल्कि बूंद -बूंद टपकती किसी चुप पीड़ा की तरह पाठक की चेतना में में उतरती जाती है।

इन लघुकथाओं में जीवन की हर वह ‘ बूंद ‘ है, जो ‘जिंदगी’ को समंदर बनाती है। ” एक लघुकथा संग्रह के रूप में कुछ और कथाओं को भी इसमें डाला जा सकता था. आकर्षक मुखपृष्ठ, सुंदर कागज पर सुन्दर प्रिंटिंग प्रभावित करती है. कहीं- कहीं मात्रागत त्रुटियां और लिंग दोष प्रूफ्र रीडिंग की कमी की ओर इशारा करती है. प्रकाशक को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है. संग्रह रोचक और पठनीय है !

संग्रह : बूंद – बूंद जिंदगी (लघुकथा संग्रह), लेखिका: मनीषा सहाय ‘सुमन ‘

पृष्ठ:94, प्रकाशक: प्राची डिजिटल पब्लिकेशन मूल्य: रु.260/-

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

ये भी पढ़ें :-पढ़ें,सत्या शर्मा ‘कीर्ति’ का काव्य संग्रह ‘लहरों का कोई अपना घर नहीं होता’

3 thoughts on “पठनीय है मनीषा सहाय ‘सुमन’ का लघुकथा संग्रह ‘बूंद-बूंद जिंदगी’

  1. बहुत सुंदर बारिकी से कि गई समीक्षा के लिये हृदय से आभारी हूँ सर 🙏🙏

  2. Backbiome is an advanced daily wellness supplement formulated to help support spinal comfort, reduce feelings of built-up tension, and promote freer, smoother movement throughout backbiome everyday life.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *