आज के तकनीकी युग में एक छोटे चिप में ही पूरे ज्ञान के भंडार को समेटने की तैयारी चल रही है.हिंदी कविता भी पहले लंबी ,कई सर्गों की होती थीं, फिर कविताओं का आकार छोटा होता गया, गजल के तर्ज पर छोटी और फिर छोटी-छोटी कविताएं लिखीं जाने लगीं! उसके बाद आई लघु कविता, लघु कथा और अब तकनीकी ज्ञान के सफलतम देश जापान से आई है “हाइकु”. इस शैली में कुछ शब्दों में ही बात कही जाती है. ताज्जुब की बात है कि बस कुछ शब्दों के चयन की कुशलता कहिए कि एक लय बन जाता है और गंभीर बात कह दी जाती है. काव्य संग्रह इसका उदाहरण है।
हिंदी में “हाइकु” शैली में कविताएं लगभग चालीस साल से लिखी जा रही हैं. आज से तीस – पैंतीस वर्ष पूर्व आरा की प्रसिद्ध कवयित्री-लेखिका उर्मिला कौल ने तो “हाइकु ” शैली में ही लिखी अपनी कविता संग्रह भी निकाला था. “क्रोध में मेघ/उड़ेला तो सागर/महाप्रलय” एक बानगी है कवयित्री सत्या शर्मा “कीर्ति” के नवीनतम कविता संग्रह “लहरों का कोई घर नहीं होता” से एक कविता (हाइकु). सत्या शर्मा “कीर्ति” की एक कविता संग्रह: “तीस पार की नदियां, एक लघुकथा संग्रह : वक्त कहाँ लौट पाता है और एक अन्य काव्य संग्रह: सीझते हुए सपने प्रकाशित हैं. इसके अतिरिक्त सत्या लगातार हिंदी पत्र पत्रिकाओं में कथा, लघुकथा, कविता, लघु कविता और हाइकु लिखती रहती हैं. राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों और सम्मानों की बहुत लंबी फेहरिस्त हैं इनकी.
इनकी रचनाओं को पढ़ते हुए लगता है कि सत्या एक शब्द चित्रकार हैं जो अपनी बात अलग-अलग शब्दों के रंग में पिरोती रहती हैं और ये भी कि सत्या अलग-अलग ढंग से किसी शास्त्रीय गायक की तरह अपने को व्यक्त करना चाहती हैं पर प्रायः अब तक कह नहीं पायी हैं. 135 पृष्ठ के इस संग्रह के प्रारंभ में कवयित्री सत्या ने संग्रह ‘प्रकृति के कण – कण को ‘ समर्पित किया है.’ उसके बाद डॉ पूर्वा शर्मा की अठारह पृष्ठों की भूमिका है ‘जापानी काव्य – रूपों की हिंदी कहानी: एक नए अध्याय से गुजरते हुए….’ इन हाइकु कविताओं की वृहत पृष्ठभूमि तैयार करती है यह भूमिका. उसके बाद कवयित्री के मनोभाव हैं.
संग्रह का पहला खंड है ‘ हाइकु। जिसमें 19 कविताओं को शामिल किया गया है. दूसरत खंड है ‘चोका’ जिसमें पांच कविताएं शामिल हैं और अंतिम खंड है ‘हाइवन जिसमे 21कविताएं हैं. प्रत्येक कविता के कई खंड हैं और कुछ हाइकु के पहले कवयित्री ने एक भूमिका भी लिखी है जिसे एक अभिनव प्रयोग भी मान सकते हैं. संग्रह सुंदर कागज पर सुंदर छपाई में प्रकाशित की गई है. शीर्षक,मुखपृष्ठ और मुखपृष्ठ की पेंटिंग आकर्षक है. संग्रह पठनीय और संग्रहणीय है. ये संग्रह मात्र हाइकु शैली में लिखी कविताएं ही नहीं हैं, एक नया एहसास भी कराती हैं.
संग्रह: लहरों का कोई घर नहीं होता, कवयित्री: सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘ , प्रकाशक: श्वेतवर्णा प्रकाशन, पृष्ठ: 135 ,मूल्य : रु.299

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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हृदय से आभार सर ।आपने इतने मन से पढ़ा और इतनी अच्छी समीक्षा की ।
लेखन सार्थक हो जाता है जब आप जैसे विद्वान उसे आशीष देते हैं।
सादर धन्यवाद
अच्छी समीक्षा!
सत्या जी को उनके नये काव्य संग्रह के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
आदरणीय सर ने नई जानकारियों के साथ बहुत अच्छी समीक्षा की है। सत्या जी को नए काव्य संग्रह के लिए बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं।