किताब का हिसाब : डॉ. कुमार संजय का ‘चेखव की चर्चित 11 कहानियों के नाट्य रूपांतर’, हिंदी को बड़ा योगदान

जिस प्रकार जब कभी इस दुनिया की सभी भाषा में उपन्यास की चर्चा होती है तो रूस के प्रतिष्ठित लेखक लियो टॉलस्टॉय का नाम लिया जाता है उसी तरह जब कभी कथा-कहानी की चर्चा की जाती है तो एक दूसरे रूसी लेखक अंतोन चेखव की चर्चा के बिना चर्चा अधूरी रह जाती है .

Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: October 31, 2024 1:15 am

उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में चेखव अपने शीर्ष पर थे.प्रायः पिछले डेढ़ सौ सालों में इतनी ज्यादा संख्या में किसी अन्य कथाकार के पाठक नहीं होंगे! चेखव (Chekhov) के विषय, कथानक, किस्सागो अद्भुत हैं. कितने पीढ़ियों ने चेखव की कहानियों को पढ़कर लिखना, ज़िंदगी समझना और जीना सीखा है. कथा के माध्यम से मानवीय संबंधों का ऐसा वर्णन शायद ही कहीं और मिले.

बीसीयों भाषा में हो चुका है चेखव की कहानियों का अनुवाद 

चेखव (Chekhov) की कहानियों का अनुवाद बीसीयों भाषा में हो चुका है .इनकी कहानियों का नाट्यरूपांतर और प्रस्तुतिकरण भी सैकड़ों बार हो चुका है . प्रस्तुत से संग्रह में अंग्रेज़ी के यशस्वी प्राध्यापक और हिंदी/अंग्रेज़ी के लेखक डॉ. कुमार संजय ने चेखव की चर्चित ग्यारह कहानियों का हिंदी में अनुवाद कर उसका सुंदर नाट्यरूपांतर किया है. कुमार संजय ने भाव को अक्षुण्ण रखा है पर पात्रों के नाम भारतीय परिवेश के अनुरूप कर दिया है जिससे दर्शक नाम में न उलझ जाएं.

सहजता से मूल कथा का आनंद लेने के लिए किया गया है भारतीयकरण 

अन्य बहुत सारी चीजों का भी भारतीयकरण किया गया है जिससे दर्शक सहजता से मूल कथा का आनंद ले सकें. इस संग्रह की कहानियां हैं : 1.खलनायकी 2.बदला 3.एक क्लर्क की मौत 4.टेढ़ा दर्पण 5.दुल्हन 6.कुमारी न की कहानी 7.गाने वाली लड़की 8.खुशी 9.कलाकृति 10.रीढ़ विहीन 11.गिरगिट नाटककार ने चेखव की कहानियों में से बहुत चुनकर कहानियों का चयन किया है.

कुमार संजय जी ने नाट्य निर्देशकों को विशेष निर्देश नहीं दिया है और उन्हें देश ,काल पात्रों के अनुरूप नाटक प्रस्तुत करने की छूट दी है. नाटकों की भाषा सरल और प्रवाहमान है, स्थानीय तकिया कलाम का भी सुंदर प्रयोग किया है. हिंदी नाट्य दर्शकों के लिये एक महत्वपूर्ण योगदान है यह पुस्तक.

प्रकाशक: विकल्प प्रकाशन, दिल्ली-90 ,

मूल्य:रु.300.    पृष्ठ:93

(पुस्तक के समीक्षक प्रमोद कुमार झा रांची दूरदर्शन केंद्र के पूर्व निदेशक हैं और कला व साहित्य के राष्ट्रीय स्तर के मर्मज्ञ हैं।)

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