डॉ शंभूशंकर झा जी ने वाल्मीकि रामायण के पांच खंडों का मैथिली में पद्यानुवाद कर प्रकाशित किया है. नब्बे पृष्ठ के इस कविता संग्रह में जीवन की लंबी यात्रा के अनुभवों का सार है. इस संग्रह में कुल पैंतालीस कविताएं हैं.
कुछ कविताओं के शीर्षक देखिए : 1.क्षण2.ममतामई माँ 3.रूपसी और कवि 4.अभिलाषा, आशा,कल्पना5.एक व्यक्तित्व 6. ओस 7.खिसके जब यादों के आँचल 8. गीत तेरे व्यर्थ न जाते 9. एक पागल 10. एकाकी 11. खो गए सारे आवाज इत्यादि. कविता “आशा!तू क्यों लुक छिप जाये” की कुछ पंक्तियों को देखिए : ‘ आशा ! तू क्यों लुक छिप जायें। /व्यथित घनों की कालिमा में/ या बाल अरुण की लालिमा में,/ खोजता कवि तेरी रश्मि बिंदु,/ तू क्यों कामिनी के दृग से ढल जाये ,/आशा!तू क्यों लुक-छिप जाए ।’ संग्रह में अलग अलग मिजाज की कविताएं शामिल हैं .
देखिए कविता “स्वप्निल आसव की रश्मि ” की कुछ पंक्तियां: ‘ श्यामल बादलों के बीच से,/छिपकर हँस रही चांदनी / धरणी पर स्वप्निल आसव की रश्मि / मुक्त हाथों से छिड़क रही है चाँदनी .’ कवि की भाषा प्रांजल है और कविताएं भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर मन को छूती हैं. संग्रह में कुछ और कविताएं शामिल किया जाता तो और आनंद आता. संग्रह संग्रहणीय और पठनीय है.
संग्रह: ‘स्मृति-वाटिका ‘(कविता संग्रह), कवि: डॉ .शंभू शंकर झा, पृष्ठ: 90, प्रकाशक:यश पब्लिकेशन ,नई दिल्ली, प्रकाशन वर्ष: 2026, मूल्य:199

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)
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