चर्चा में है डॉ. शंभू शंकर झा की कविताओं का संग्रह “स्मृति वाटिका”

कहते हैं गंभीर कविता जीवन के अनुभवों में ही बनती है,तपती है और तभी आत्मा से निकलती है! "स्मृति वाटिका " (कविता संग्रह) के कवि डॉ .शंभू शंकर झा पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर और प्रबंधन विशेषज्ञ हैं. इनकी मैथिली में पांच पुस्तकें (कथा संग्रह सहित)प्रकाशित हैं.

पुस्तक के आवरण पृष्ठ का अंश
Written By : प्रमोद कुमार झा | Updated on: June 17, 2026 11:02 pm

डॉ शंभूशंकर झा जी ने वाल्मीकि रामायण के पांच खंडों का मैथिली में पद्यानुवाद कर प्रकाशित किया है. नब्बे पृष्ठ के इस कविता संग्रह में जीवन की लंबी यात्रा के अनुभवों का सार है. इस संग्रह में कुल पैंतालीस कविताएं हैं.

कुछ कविताओं के शीर्षक देखिए : 1.क्षण2.ममतामई माँ 3.रूपसी और कवि 4.अभिलाषा, आशा,कल्पना5.एक व्यक्तित्व 6. ओस 7.खिसके जब यादों के आँचल 8. गीत तेरे व्यर्थ न जाते 9. एक पागल 10. एकाकी 11. खो गए सारे आवाज इत्यादि. कविता “आशा!तू क्यों लुक छिप जाये” की कुछ पंक्तियों को देखिए : ‘ आशा ! तू क्यों लुक छिप जायें। /व्यथित घनों की कालिमा में/ या बाल अरुण की लालिमा में,/ खोजता कवि तेरी रश्मि बिंदु,/ तू क्यों कामिनी के दृग से ढल जाये ,/आशा!तू क्यों लुक-छिप जाए ।’ संग्रह में अलग अलग मिजाज की कविताएं शामिल हैं .

देखिए कविता “स्वप्निल आसव की रश्मि ” की कुछ पंक्तियां: ‘ श्यामल बादलों के बीच से,/छिपकर हँस रही चांदनी / धरणी पर स्वप्निल आसव की रश्मि / मुक्त हाथों से छिड़क रही है चाँदनी .’ कवि की भाषा प्रांजल है और कविताएं भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर मन को छूती हैं. संग्रह में कुछ और कविताएं शामिल किया जाता तो और आनंद आता. संग्रह संग्रहणीय और पठनीय है.

संग्रह: ‘स्मृति-वाटिका ‘(कविता संग्रह), कवि: डॉ .शंभू शंकर झा, पृष्ठ: 90, प्रकाशक:यश पब्लिकेशन ,नई दिल्ली, प्रकाशन वर्ष: 2026, मूल्य:199

(प्रमोद कुमार झा तीन दशक से अधिक समय तक आकाशवाणी और दूरदर्शन के वरिष्ठ पदों पर कार्यरत रहे. एक चर्चित अनुवादक और हिन्दी, अंग्रेजी, मैथिली के लेखक, आलोचक और कला-संस्कृति-साहित्य पर स्तंभकार हैं।)

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One thought on “चर्चा में है डॉ. शंभू शंकर झा की कविताओं का संग्रह “स्मृति वाटिका”

  1. डॉ शंभु शंकर झा जी बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे हैं। चाहे मैकैनिकल इंजीनियरिंग हो या मैनेजमेंट के कठिन से कठिन गुर ..या.. सनातन संस्कृति, रामायण, गीता,वेद उपनिषद् पुराण से संबंधित गूढ़ रहस्य – डॉ झा बहुत सरलता से सामान्य जिज्ञासुओं को समझा सकने में सक्षम और सिद्धहस्त हैं। इसका प्रमाण इनकी सुंदर रचनाएं हैं। मुझे गर्व है कि बचपन से इनका सान्निध्य रहा है – इनके ब्रिलिएंस का कायल रहा हूं।
    शुभाकांक्षी: नागेश चन्द्र मिश्र सेवानिवृत्त अभियंता प्रमुख, झारखंड बिहार सरकार

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