शारदा सिन्हा: एक आवाज़ जिसने बिहार की आत्मा को सुरों में पिरोया

1984 में पहली बार गंगा पार कर उत्तर बिहार के सहरसा जाने का अवसर मिला, जहाँ बाढ़ राहत कार्य के दौरान शारदा सिन्हा के भजन सुने। उनकी आवाज़ ने ऐसा असर छोड़ा कि कलकत्ता की सड़कों पर उनके गाने "पनियाँ के जहाज से पलटनिया" को सुनने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। वह ऐसी गायिका थीं, जिनका गीत लोगों को रास्ता रोकने पर मजबूर कर देता था।

Written By : दिनेश मिश्रा | Updated on: November 6, 2024 8:38 pm

1984 में मैं पहली बार गंगा पार करके उत्तर बिहार में सहरसा गया जहाँ कोसी बाँध टूटने के बाद कुछ राहत कार्य चलाना था। वहीं पहली बार शारदा सिन्हा जी के भजन कैसेट पर सुने थे। मेरे एक मराठी मित्र थे विकास भाई जो थे तो मेकैनिकल इंजीनियर पर किसी विधान से सर्वोदय कार्यकर्ता हो गये थे।

मुझे सहरसा लाने में उनका बड़ा योगदान था और राहत कार्यों में मदद के लिये गाहे-बगाहे वह भी सहरसा आया-जाया करते थे। एक दिन उन्होंने भी शारदा जी के गाये भजन सुने और मुझसे कहा कि इनके गाये जितने भी कैसेट हैं लाकर मुझे दो। मैंने उन्हें वह सब मंगा कर दिये।

कुछ दिनों बाद किसी प्रयोजन से मेरा कलकत्ता जाना हुआ और मैं एक जीप में बैठा हुआ ग्रैंड होटल के पास से गुजर रहा था तो वहाँ भीड़ दिखी।

मैंने ड्राइवर से पूछा कि इतनी भीड़ यहाँ कैसे है? उसने बताया कि एक नया कैसेट आया है गाने का उसी को सुनने के लिये भीड़ लगी है। मैने उससे कहा कि वापस चलो, ऐसा कैसा गाना है जिसे सुनने के लिये इतने लोग भीड़ लगा दें। वह गाड़ी घुमा कर मुझे वहाँ यह कहते हुए ले गया कि वहाँ पुलिस वाला गाड़ी देर तक खड़ा नहीं करने देगा। फिर भी चलो, मैंने कहा। थोड़ी देर में हम लोग जीप में बैठे-बैठे भीड़ का हिस्सा बन गये। गाना बज रहा था, “पनियाँ के जहाज से पलटनिया…”। मैंने कौतूहल वश एक आदमी से पूछा कि ये कौन गा रहा है?

उसने बताया कि कोई शारदा सिन्हा हैं बिहार की। मैंने पूछा कि वह तो भजन गाती हैं? वह बोला कि गाती होंगी पर अभी तो यह गाना सुनिये। यह कैसेट जहाँ बजता है, इतनी ही भीड़ जमा होती है। कभी-कभी रास्ता जाम हो जाने पर पुलिस खदेड़ती है लोगों को।

जिसका गायन आपका रास्ता रोक कर सुनने के लिये मजबूर कर दे उन विदुषी गायिका का चले जाना बहुत भारी पड़ता है।

 

 

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2 thoughts on “शारदा सिन्हा: एक आवाज़ जिसने बिहार की आत्मा को सुरों में पिरोया

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