रूसी सैन्य विमानों की लैंडिंग ऐसे समय हुई है जब BRICS में भाग लेने के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली पहुंचने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। हालांकि, पुतिन का विमान जेवर में ही उतरेगा, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। रूसी विमानों की मौजूदगी को उनकी यात्रा की सुरक्षा और लॉजिस्टिक तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
ये है BRICS का इतिहास
BRICS (ब्रिक्स) दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंच है, जिसका नाम शुरुआत में Brazil, Russia, India और China के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना BRIC था। 2001 में Goldman Sachs के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने BRIC शब्द का इस्तेमाल इन तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया था। इसके बाद चारों देशों के बीच औपचारिक सहयोग बढ़ा और 16 जून 2009 को रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका को सदस्यता के लिए आमंत्रित किया गया और 2011 में उसके शामिल होने के बाद समूह का नाम BRICS हो गया। 2024-25 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया के जुड़ने से इसका विस्तार हुआ। इसका प्रमुख उद्देश्य आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार और Global South की आवाज को मजबूत करना है।
दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा जवान
BRICS सम्मेलन की सुरक्षा के लिए दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 100 से ज्यादा NSG कमांडो भी शामिल हैं। एयरपोर्ट, होटल, भारत मंडपम और विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आवागमन वाले मार्गों को अलग-अलग सुरक्षा सेक्टरों में बांटा गया है। एंटी-ड्रोन सिस्टम और अत्याधुनिक निगरानी व्यवस्था भी सक्रिय की गई है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल और मोटरकेड रिहर्सल कर रही हैं।
चाणक्यपुरी के डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में सुरक्षा सबसे ज्यादा कड़ी है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए अलग-अलग होटल निर्धारित किए गए हैं। दोनों देशों की एडवांस सुरक्षा टीमें पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी हैं और होटल तथा उनके आसपास के इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था अपने नियंत्रण में ले चुकी हैं।
35 से ज्यादा सड़कें प्रभावित, 22 जगह डायवर्जन
सम्मेलन का असर अब आम दिल्लीवाले की रोजमर्रा की आवाजाही पर भी दिखाई देने लगा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 35 से ज्यादा सड़कों को नियंत्रित यातायात वाले मार्गों की सूची में रखा है और 22 डायवर्जन प्वाइंट बनाए गए हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी सड़कें तीनों दिन पूरी तरह बंद रहेंगी। VVIP काफिलों की आवाजाही के दौरान संबंधित मार्गों पर यातायात रोककर या मोड़कर आगे बढ़ाया जाएगा।
जिन प्रमुख मार्गों से आम वाहन चालकों को बचने की सलाह दी गई है, उनमें मथुरा रोड, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, तीस जनवरी मार्ग, फिरोजशाह रोड, तुगलक रोड, पंचशील मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, अफ्रीका एवेन्यू, पुराना किला रोड, शांति पथ, तिलक मार्ग, डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग, राजेश पायलट मार्ग, अकबर रोड, सरदार पटेल मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, कौटिल्य मार्ग, केमल अतातुर्क मार्ग, कर्तव्य पथ और सफदरजंग रोड शामिल हैं।
कनॉट प्लेस खुला, लेकिन रास्ते बदलेंगे
नई दिल्ली के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल कनॉट प्लेस को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। बाजार खुले रहेंगे, लेकिन आसपास VVIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक को रोका या डायवर्ट किया जा सकता है। Janpath, Patel Chowk और आसपास के मार्गों पर विशेष निगरानी रहेगी। यही वजह है कि पुलिस ने लोगों को अनावश्यक सड़क यात्रा से बचने और खासकर नई दिल्ली, मध्य दिल्ली तथा एयरपोर्ट की तरफ जाने वालों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी है।
एयरपोर्ट जाने वालों को विशेष सावधानी
BRICS के कारण दिल्ली एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से IGI एयरपोर्ट पहुंचने के वैकल्पिक मार्ग बताए हैं और जहां संभव हो वहां मेट्रो को प्राथमिकता देने की सलाह दी है। मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी, हालांकि सड़क मार्ग से आने वाली बसों, टैक्सियों और ऑटो को VVIP मूवमेंट के दौरान डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है। रेल यात्रियों के लिए भी नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्गों को लेकर अलग इंतजाम किए गए हैं। यात्रियों से अतिरिक्त समय लेकर चलने को कहा गया है।
जेवर से भारत मंडपम तक सुरक्षा का घेरा
BRICS की तैयारियों ने इस बार दिल्ली की भौगोलिक सीमा को भी पार कर दिया है। जेवर में रूसी सैन्य विमानों की लैंडिंग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सामान्य तौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के विशेष विमान दिल्ली के IGI एयरपोर्ट या एयरफोर्स स्टेशन पालम से जुड़े रहते हैं, लेकिन इस बार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूसी सैन्य विमानों का पहुंचना इस नए एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय VVIP लॉजिस्टिक्स के नक्शे पर ले आया है। रूस की एडवांस टीम के पहुंचने के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने भी एयरपोर्ट परिसर में निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि पुतिन के विमान के इसी एयरपोर्ट पर उतरने की बात अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं है।
सिर्फ सुरक्षा नहीं, पूरी दिल्ली की परीक्षा
12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में होने वाले सम्मेलन में 11 सदस्य देशों और 10 पार्टनर देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत यात्रा और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मौजूदगी ने इस सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में दिल्ली के सामने चुनौती केवल विदेशी मेहमानों की सुरक्षा की नहीं, बल्कि VVIP मूवमेंट और करोड़ों की आबादी वाली महानगरीय जिंदगी के बीच संतुलन बनाए रखने की भी है। 35 से ज्यादा सड़कों पर नियंत्रित आवाजाही, 22 डायवर्जन प्वाइंट, हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती और लगातार मोटरकेड रिहर्सल इस बात का संकेत हैं कि अगले तीन दिन दिल्ली में सामान्य दिनों से बिल्कुल अलग होंगे। एक तरफ भारत मंडपम में दुनिया की बड़ी ताकतें बदलती वैश्विक व्यवस्था पर मंथन करेंगी, तो दूसरी तरफ सड़कों पर दिल्ली इस महामंथन की कीमत और उसकी तैयारी—दोनों को महसूस करेगी।
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