कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी ब्रिटेन (यूके) के नागरिक हैं। इस याचिका में उनकी भारतीय नागरिकता रद्द करने की और सीबीआई जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर, जो कर्नाटक के निवासी हैं, का दावा है कि राहुल गांधी का नाम ब्रिटेन के नागरिकता रिकॉर्ड में मौजूद है। उन्होंने इस संदर्भ में ब्रिटेन सरकार से मिली जानकारी का हवाला दिया है।
अदालत में केंद्र सरकार का पक्ष
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस.बी. पांडे ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय ने याचिकाकर्ता द्वारा भेजी गई शिकायत प्राप्त कर ली है और इस पर जांच की प्रक्रिया जारी है। अदालत ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह तीन सप्ताह के भीतर मामले पर अपनी रिपोर्ट पेश करे। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर, 2024 को होगी।
गृह मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा, “याचिकाकर्ता द्वारा दिया गया प्रेषण गृह मंत्रालय के पास पहुंच चुका है और इसे प्रक्रिया के तहत जांचा जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई की तारीख पर अदालत को जांच की प्रगति से अवगत कराया जाएगा।”
याचिकाकर्ता का पक्ष और आरोप
याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर ने एक साक्षात्कार में कहा, “अदालत ने इस मामले में स्पष्ट और अंतिम निर्णय 19 दिसंबर तक लेने का निर्देश दिया है। गृह मंत्रालय को अपने निष्कर्ष अदालत के समक्ष पेश करने होंगे।”
उन्होंने आगे दावा किया, “हमें ब्रिटेन सरकार से सीधे तौर पर पुष्टि प्राप्त हुई है कि राहुल गांधी का नाम उनके नागरिकता रिकॉर्ड में दर्ज है। हमने सभी दस्तावेज अदालत में पेश कर दिए हैं। भारतीय कानून के अनुसार, दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है।”
क्या है भारतीय कानून में प्रावधान?
भारतीय संविधान और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत, भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो वह स्वत: रूप से भारतीय नागरिकता खो देता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की नागरिकता ली है, जो इस कानून का उल्लंघन है।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस याचिका ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा पहले भी उठ चुका है, लेकिन इस बार अदालत में मामला दर्ज होने और गृह मंत्रालय की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
अगली सुनवाई पर सबकी नजर
अब 19 दिसंबर, 2024 को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि गृह मंत्रालय इस मामले में क्या निष्कर्ष पेश करता है। यदि याचिकाकर्ता के दावे सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
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