पटना: जन सुराज पार्टी के नेता और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर को पटना के बेउर जेल में लगभग तीन घंटे बिताने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। पटना सीजेएम कोर्ट ने पहले प्रशांत किशोर को कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी, लेकिन उन्होंने शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें जेल भेजा गया था।
जेल से रिहाई तक का घटनाक्रम
प्रशांत किशोर को 4 जनवरी को पटना पुलिस ने गांधी मैदान से गिरफ्तार किया था। वह बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा की रद्दीकरण और दोबारा परीक्षा कराने की मांग को लेकर गांधी प्रतिमा के पास बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठे थे। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने प्रशांत को मेडिकल जांच के लिए कई जगह घुमाया और अंत में फतुहा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराई।
पटना सिविल कोर्ट में पेशी के दौरान उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दी गई थी। शर्तों में भविष्य में धरना-प्रदर्शन न करना भी शामिल था, जिसे प्रशांत ने अपने अधिकारों का हनन बताते हुए जमानत बांड साइन करने से इनकार कर दिया। इसके चलते उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया।
जेल से रिहाई
जेल वार्ड में भेजने की प्रक्रिया से पहले ही सीजेएम कोर्ट ने प्रशांत किशोर की जमानत की शर्तें हटा दीं। इसके बाद उन्हें बेउर थाना लाया गया, जहां निजी मुचलका भरवाने के बाद रिहा कर दिया गया। जन सुराज पार्टी के सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर जेल परिसर में लगभग तीन घंटे रहे।
रिहा होने के बाद प्रशांत ने कहा कि उनका अनशन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, “यह मेरे अनशन का पांचवां दिन है और मैं सिर्फ पानी ले रहा हूं। जेल में भी मैंने अपना अनशन जारी रखा। यह अनशन तब तक चलेगा जब तक बीपीएससी की परीक्षा रद्द करके दोबारा नहीं ली जाती।”
प्रशासन और बीपीएससी का पक्ष
बीपीएससी ने 22 केंद्रों पर परीक्षा दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया था, लेकिन प्रशांत किशोर और परीक्षार्थी इसे अस्वीकार्य मानते हुए पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। पटना डीएम चंद्रशेखर सिंह ने कहा था कि परीक्षा के बाद अनशनकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, प्रशांत को गांधी मैदान से हटाने के लिए प्रशासन ने उन्हें गर्दनीबाग में धरना-प्रदर्शन करने का नोटिस भी जारी किया था।
जन सुराज के समर्थन में प्रदर्शन
प्रशांत किशोर का यह कदम न केवल परीक्षार्थियों के अधिकारों की लड़ाई है, बल्कि प्रशासन के रवैये के खिलाफ भी है। उन्होंने अपनी रिहाई के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “हम किसी भी परिस्थिति में पीछे नहीं हटेंगे। यह आंदोलन आम लोगों के अधिकारों के लिए है।”
प्रशांत किशोर की यह भूख हड़ताल और गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी मांगों पर सरकार और बीपीएससी का क्या रुख रहता है।
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