जन्म कुंडली का छठा भाव माना जाता है रोग, ऋण और शत्रु का भाव

जन्म कुंडली (वैदिक ज्योतिष) में छठा भाव (षष्ठ भाव) को मुख्य रूप से रोग, ऋण और शत्रु का भाव कहा जाता है। इसे अरिष्ट भाव भी माना जाता है क्योंकि यह संघर्षों और चुनौतियों से जुड़ा होता है।

Written By : नीतेश तिवारी | Updated on: May 4, 2025 11:58 pm

जन्म कुंडली का छठा भाव यानि शत्रु का भाव होता है। यहां विभिन्न ग्रहों और राशियों के शुभ और अशुभ प्रभाव का विश्लेषण करते हैं।

मुख्य संकेत:

स्वास्थ्य समस्याएँ, बीमारियाँ

शत्रुओं से संघर्ष, प्रतियोगिता

ऋण, कर्ज, वित्तीय बोझ

कोर्ट-कचहरी, मुकदमेबाज़ी

सेवा, नौकरी, मातहत कर्मचारी

पालतू जानवर

अगर जन्म कुंडली का छठा भाव मज़बूत और शुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो व्यक्ति शत्रुओं पर विजय पाता है, बीमारियों से उबरता है और मुश्किलों में भी सफल रहता है। अगर अशुभ ग्रह या पाप ग्रह (जैसे राहु, शनि, मंगल) नकारात्मक रूप से असर डालें, तो स्वास्थ्य समस्याएँ, कोर्ट केस या कर्ज़ की समस्याएँ बढ़ सकती हैं।

छठे भाव में राशियों का सामान्य प्रभाव:

1. मेष (मंगल की राशि)
– व्यक्ति साहसी, शत्रु पर हावी, मगर कभी-कभी खुद की जल्दबाज़ी से नुकसान।
– चोट या जलने-कटने का खतरा।

2. वृष (शुक्र की राशि)
– वित्तीय मामलों में सावधानी, लेकिन शत्रु पर संयम से विजय।
– कभी-कभी आरामप्रियता स्वास्थ्य में ढिलाई लाती है।

3. मिथुन (बुद्ध की राशि)
– बौद्धिक प्रतियोगिता में जीत, चालाक शत्रु।
– मानसिक तनाव या तंत्रिका संबंधी समस्याएँ।

4. कर्क (चंद्रमा की राशि)
– भावनात्मक शत्रु, परिवार से जुड़े संघर्ष।
– मानसिक चिंता, पेट या पाचन से जुड़ी परेशानियाँ।

5. सिंह (सूर्य की राशि)
– अधिकार के कारण शत्रु पैदा हो सकते हैं, लेकिन नेतृत्व से विजय मिलती है।
– दिल या रीढ़ से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ संभावित।

6. कन्या (बुद्ध की राशि, मूल त्रिकोण)
– स्वास्थ्य और सेवा में अच्छा, शत्रु पर विवेक से विजय।
– कभी ज़्यादा सोचने से तनाव।

7. तुला (शुक्र की राशि)
– संतुलित दृष्टिकोण से शत्रुओं को मैनेज करता है, कानूनी मामलों में सफलता।
– शारीरिक सौंदर्य या त्वचा से जुड़ी समस्याएँ।

8. वृश्चिक (मंगल की राशि)
– गुप्त शत्रु, अचानक समस्याएँ, मगर साहस से विजय।
– ऑपरेशन या गुप्त रोगों की संभावना।

9. धनु (गुरु की राशि)
– नैतिक दृष्टिकोण, धार्मिक या कानूनी संघर्ष।
– जंघा या जांघों से जुड़ी समस्याएँ।

10. मकर (शनि की राशि)
– धैर्य से शत्रुओं पर विजय, मगर धीरे-धीरे।
– हड्डियों या त्वचा से संबंधित रोग।

11. कुंभ (शनि की राशि)
– समूह या सामाजिक शत्रु, तकनीकी या विचारधारा के मतभेद।
– रक्तचाप या नसों से जुड़ी दिक्कतें।

12. मीन (गुरु की राशि)
– भावनात्मक शत्रु, छुपे हुए शत्रु, आध्यात्मिक दृष्टि से समाधान।
– एलर्जी या अनजाने रोग।

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सूर्य (Sun)

शुभ: नेतृत्व क्षमता, आत्मबल, प्रसिद्धि, उच्च पद, सम्मान
अशुभ: अहंकार, पिता से दूरी, हृदय रोग, गुस्सा, अकेलापन

चंद्रमा (Moon)

शुभ: मन की शांति, मातृ सुख, सौम्यता, कल्पनाशक्ति, लोकप्रियता
अशुभ: मानसिक अस्थिरता, चंचलता, जल संबंधी रोग, भावनात्मक कमजोरियाँ

मंगल (Mars)

शुभ: साहस, ऊर्जा, भूमि-वाहन सुख, नेतृत्व, शौर्य
अशुभ: क्रोध, दुर्घटना, रक्त विकार, झगड़ा, कानूनी विवाद

बुध (Mercury)

शुभ: बुद्धि, लेखन, संवाद कला, व्यापार में लाभ, व्यावहारिकता
अशुभ: चालाकी, झूठ, मानसिक तनाव, तंत्रिका संबंधी रोग

गुरु / बृहस्पति (Jupiter)

शुभ: ज्ञान, धर्म, गुरु का आशीर्वाद, संतान सुख, भाग्य वृद्धि
अशुभ: अहंकार, आलस्य, मोटापा, गलत निर्णय

शुक्र (Venus)

शुभ: कला, सौंदर्य, प्रेम, दांपत्य सुख, विलासिता, संपत्ति
अशुभ: भोग-विलास में डूबना, व्यसन, अनैतिक संबंध, व्यर्थ खर्च

शनि (Saturn)

शुभ: अनुशासन, परिश्रम, न्याय, धैर्य, संगठन क्षमता
अशुभ: डर, अकेलापन, गरीबी, देरी, शारीरिक कष्ट, निराशा

राहु (Rahu)

शुभ: विदेशी संपर्क, आधुनिक तकनीक, राजनीति, अप्रत्याशित लाभ
अशुभ: भ्रम, धोखा, लत, अनैतिक गतिविधियाँ, मानसिक विकार

केतु (Ketu)

शुभ: मोक्ष, आध्यात्मिकता, शोध, त्याग, अंतर्दृष्टि
अशुभ: विच्छेदन, अकेलापन, मानसिक उलझन, अप्रत्याशित नुकसान

(नीतेश तिवारी, एमसीए, एमएचए हैं और ज्योतिष शास्त्र के अच्छे जानकार हैं.)

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2 thoughts on “जन्म कुंडली का छठा भाव माना जाता है रोग, ऋण और शत्रु का भाव

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