शांति की अपील करने पर ट्रोल हुईं शहीद नेवी अफसर की पत्नी, महिला आयोग सख्त

पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए नेवी अफसर विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। शांति की अपील के बाद हुए इस ट्रोलिंग पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने सख्त नाराजगी जताई है और कहा है कि किसी महिला की निजी राय को इस तरह निशाना बनाना बेहद निंदनीय है।

Written By : MD TANZEEM EQBAL | Updated on: May 5, 2025 8:29 pm

नई दिल्ली:जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में शहीद हुए भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी नरवाल इन दिनों सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं। नवविवाहित हिमांशी ने अपने पति की शहादत के बाद देश से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने खासतौर पर मुसलमानों और कश्मीरियों के खिलाफ बढ़ती नफरत को रोकने की बात कही थी। इसी अपील को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जा रहा है।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने इस ट्रोलिंग को “निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण” करार देते हुए हिमांशी के समर्थन में बयान जारी किया है। आयोग ने कहा कि किसी महिला को उसके व्यक्तिगत विचारों को लेकर निशाना बनाना अस्वीकार्य है।

NCW का सख्त रुख

महिला आयोग ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई नागरिकों के साथ-साथ लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की भी निर्मम हत्या कर दी गई। उनकी पत्नी हिमांशी नरवाल द्वारा शांति की अपील के बाद सोशल मीडिया पर जिस तरह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।”

आयोग की अध्यक्ष विजय रहाटकर ने भी अलग से बयान देते हुए कहा, “यदि किसी को उनके विचार पसंद नहीं आए तो असहमति शालीनता के साथ प्रकट की जा सकती है, लेकिन किसी महिला की निजी जिंदगी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करना बेहद आपत्तिजनक है।”

नई शादी, हनीमून पर हादसा

हिमांशी और विनय नरवाल की शादी कुछ ही दिन पहले हुई थी। दोनों कश्मीर हनीमून पर गए थे, जहाँ यह आतंकी हमला हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आतंकियों ने लोगों से धर्म पूछकर गोली चलाई, जिसमें विनय नरवाल सहित 26 लोग मारे गए।

हमले के बाद हिमांशी नरवाल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिसमें वह अपने पति के पार्थिव शरीर के पास बैठी दिखीं, हाथों में शादी के चूड़े पहने हुए। यह दृश्य पूरे देश को झकझोर कर रख देने वाला था।

“हमें केवल शांति चाहिए” – हिमांशी

हमले के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बोलते हुए हिमांशी ने देशवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि पूरा देश उनके (विनय) लिए प्रार्थना करे कि उन्हें शांति मिले। मैं बस इतना ही चाहती हूं। लेकिन मैं यह भी कहना चाहती हूं कि मैं देख रही हूं कि नफरत बढ़ रही है, खासकर मुसलमानों और कश्मीरियों के खिलाफ। हम ऐसा नहीं चाहते। हमें केवल शांति चाहिए, और कुछ नहीं।”

हालांकि, उनकी इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने भद्दे और व्यक्तिगत कमेंट करने शुरू कर दिए। कुछ ने यह तक कहा कि उन्हें अपने पति की पेंशन नहीं मिलनी चाहिए। इन ट्रोल्स के खिलाफ कई लोगों ने हिमांशी का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें इस कठिन समय में सहानुभूति और सम्मान मिलना चाहिए।

संवेदना और न्याय की मांग

हिमांशी ने सरकार से हमले में शामिल लोगों को कड़ी सजा देने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस नृशंस घटना के पीछे हैं, उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल उठाती है कि आतंक के शिकार लोगों के परिजनों को न केवल मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है, बल्कि समाज के एक हिस्से द्वारा भी उन्हें बेवजह निशाना बनाया जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप इस दिशा में एक जरूरी कदम है।

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