ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान सिर्फ चेहरा था, सीमा पर थे कई दुश्मन : ले. जनरल राहुल आर. सिंह

थलसेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बारे में  कई खुलासे किए  हैं। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो  ये चार दिवसीय सैन्य संघर्ष हुआ वह सीमित युद्ध नहीं था, उसमें चीन और तुर्की भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से पाकिस्तान का साथ दे रहे थे।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: July 4, 2025 11:28 pm

 ले. जनरल राहुल आर. सिंह ने फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) में आयोजित ‘न्यू एज मिलिट्री टेक्नोलॉजी’ सम्मेलन में ये बात कही।

चीन के लिए ‘लाइव लैब’ पाकिस्तान

ले. जनरल सिंह ने बताया कि पाकिस्तान को 81 फीसदी सैन्य उपकरण चीन से मिले हैं, जिससे यह एक तरह से चीन के हथियारों की ‘लाइव लैब’ बन गया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को भारतीय वायुसेना की गतिविधियों, एयरबेस मूवमेंट आदि की रियल-टाइम खुफिया सूचनाएं मुहैया कराई। इस खुफिया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान ने भारत के खास लक्ष्यों को चिन्हित किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि पाकिस्तान और चीन के बीच सिर्फ हथियार नहीं, बल्कि सूचना युद्ध का भी गठबंधन था।

तुर्की ने ड्रोन और पायलट भी दिए

इसी तरह तुर्की ने पाकिस्तान को अत्याधुनिक बायरकतार ड्रोन, उन्हें उड़ाने के लिए प्रशिक्षित ड्रोन पायलट, और तकनीकी सहयोग दिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की के करीब 300–400 ड्रोन भारतीय क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए दागे गए। हालांकि भारत की वायु रक्षा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट ने इन हमलों को नाकाम कर दिया।

 भारत 21 स्थानों की पहचान की थी

इस अभियान के दौरान भारत ने  हमले के लिए पाकिस्तान के 21 ठिकानों की पहचान की थी, जिनमें से 9 पर वास्तविक हमले हुए।  लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने बताया कि यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत था कि भारत अब न केवल सहन करता है, बल्कि प्रभावी और योजनाबद्ध तरीके से जवाब देने में सक्षम है।

भारत के लिए भविष्य की चेतावनी

सेना उप प्रमुख राहुल आर. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में युद्ध केवल सीमा तक सीमित नहीं रहेंगे। अब निशाने पर आबादी वाले केंद्र, आर्थिक ढांचे और साइबर सिस्टम को भी लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को नए युद्ध आयामों में तैयारी करनी होगी — जिसमें एयर डिफेंस, सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन और इन्फॉर्मेशन डोमिनेंस शामिल हैं। ऑपरेशन सिंदूर अब केवल एक सीमित संघर्ष नहीं, बल्कि एक  शक्तियों की संलिप्तता वाला त्रिकोणीय सैन्य संघर्ष का उदाहरण बन चुका है। भारत अब हर मोर्चे पर लड़ने और जीतने के लिए तैयार है।

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4 thoughts on “ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान सिर्फ चेहरा था, सीमा पर थे कई दुश्मन : ले. जनरल राहुल आर. सिंह

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