विपक्षी गठबंधन INDIA ने सरकार के खिलाफ संयुक्त संघर्ष का फूंका बिगुल

हाल के चुनावी झटकों और विपक्षी खेमे में मतभेदों की चर्चाओं के बीच सोमवार को राजधानी के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में INDIA (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन की अहम बैठक हुई। 23 विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने एक मंच पर आकर केंद्र सरकार के खिलाफ संसद से सड़क तक संयुक्त संघर्ष छेड़ने का संकल्प लिया। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घोषणा की कि विपक्ष लोकतंत्र, संविधान और जनता से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर देशव्यापी आंदोलन चलाएगा।

विपक्षी गठबंधन INDIA की नई दिल्ली स्थित कंस्टीट्यूशन क्लब में हुई बैठक में नेता गण
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: June 9, 2026 12:03 am

विपक्षी गठबंधन INDIA की  इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती सहित कई प्रमुख विपक्षी नेता मौजूद रहे। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में हिस्सा लिया।

हालांकि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) बैठक से दूर रही, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी गठबंधन से अपनी दूरी बनाए रखी है। इसके बावजूद विपक्षी नेताओं ने इसे एकजुटता का प्रदर्शन बताते हुए सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार की।

सरकार को घेरने के लिए पांच बड़े मुद्दे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद जिन मुद्दों को लेकर संयुक्त अभियान चलाने की घोषणा की, उनमें सबसे प्रमुख मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) का मुद्दा रहा। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आ रही हैं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए इसकी व्यापक समीक्षा आवश्यक है।

दूसरा बड़ा मुद्दा प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं का रहा। विपक्ष का कहना है कि लगातार हो रहे पेपर लीक से करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार इस संकट को रोकने में विफल रही है।

तीसरा मुद्दा कथित क्रोनी कैपिटलिज्म (चहेते पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने) का उठाया गया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का लाभ सीमित औद्योगिक समूहों को मिल रहा है जबकि छोटे व्यवसाय, किसान और मध्यम वर्ग दबाव झेल रहे हैं।

चौथा मुद्दा गैर-एनडीए शासित राज्यों के साथ केंद्र सरकार के व्यवहार का रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थाओं के माध्यम से विपक्षी राज्यों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है, जिससे संघीय ढांचे की भावना प्रभावित हो रही है।

पांचवां मुद्दा दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और अन्य हाशिये के समुदायों के खिलाफ अत्याचारों का रहा। विपक्ष ने कहा कि सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

इसके अलावा बैठक में केंद्र की विदेश नीति, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

एकता का संदेश देने की कोशिश

बैठक ऐसे समय हुई है जब विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर लगातार सवाल उठ रहे थे। कई राज्यों में सहयोगी दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं और कुछ सहयोगियों की अनुपस्थिति ने भी चर्चाओं को जन्म दिया। इसके बावजूद बैठक में शामिल नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश देने का प्रयास किया कि भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ संघर्ष के लिए विपक्ष एक मंच पर खड़ा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल तत्काल राजनीतिक मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी समन्वय को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विपक्षी दलों का मानना है कि संसद के भीतर और बाहर संयुक्त आंदोलन के जरिए ही सरकार पर प्रभावी दबाव बनाया जा सकता है।

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