विशेष बात यह रही कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने कॉकरोच के मुखौटे पहन रखे थे। उनके हाथों में संविधान की प्रतियां, तिरंगा और गुलाब के फूल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इस प्रदर्शन में जाने माने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। उन्होंने घोषणा कर रखी थी कि यदि इस आंदोलन के नेता अभिजीत दीपके को गिरफ्तार किया गया तो वे भूख हड़ताल करेंगे।
हाल के महीनों में सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से लोकप्रिय हुए इस आंदोलन ने पहली बार सड़क पर अपनी ताकत दिखाई। आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके भी प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं का भरोसा शिक्षा व्यवस्था पर लगातार कमजोर हो रहा है और सरकार को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका कहना था कि शिक्षा मंत्रालय इन समस्याओं को रोकने में विफल रहा है, इसलिए शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।
जंतर-मंतर पर दिनभर चले प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने संविधान की प्रस्तावना पढ़ी, राष्ट्रीय ध्वज लहराया और पुलिसकर्मियों को गुलाब भेंट कर अपने आंदोलन को अहिंसक बनाए रखने का संदेश दिया। बड़ी संख्या में मौजूद पुलिस बल की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस प्रदर्शन ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान आकर्षित किया। विदेशी समाचार एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इसे भारत के युवाओं के बढ़ते असंतोष, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग और सोशल मीडिया से निकलकर सड़क पर पहुंचे एक नए युवा आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया आधारित इस आंदोलन की वास्तविक ताकत का आकलन अभी बाकी है, लेकिन जंतर-मंतर पर हुई भारी भीड़ ने यह संकेत जरूर दिया है कि शिक्षा, रोजगार और भविष्य को लेकर युवाओं के बीच गहरी बेचैनी मौजूद है।
फिलहाल आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि उनकी प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजधानी में हुए इस प्रदर्शन ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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