धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े आंदोलनकारी एवं विपक्षी नेता, चौतरफा दबाव में सरकार ने एक साथ खोले कई मोर्चे

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष और आंदोलनकारी छात्रों का दबाव शुक्रवार को भी बरकरार रहा। संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह पूरी तरह इस मुद्दे पर ठप रहने के बाद केंद्र सरकार ने राजनीतिक, प्रशासनिक और कानूनी—तीनों स्तरों पर एक साथ सक्रियता दिखाई। सरकार ने बातचीत कर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त करवाया। सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का नया दौर शुरू हुआ।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: July 24, 2026 10:10 pm

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की रात एक वीडियो संदेश में छात्रों को संबोधित करते हुए पेपर लीक को कोई साधारण मामला नहीं बताया और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक के खिलाफ कानून को और सख्त बनाने वाले संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित संशोधनों में अधिकतम 10 वर्ष की कैद, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और त्वरित सुनवाई जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलनकारी छात्रों और विपक्ष ने इन कदमों को अपर्याप्त बताते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और स्पष्ट कर दिया कि जब तक राजनीतिक जवाबदेही तय नहीं होती, संसद से लेकर सड़क तक उसका विरोध जारी रहेगा।

आंदोलन ने बदला राजनीतिक एजेंडा

नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों से शुरू हुआ विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रह गया है। पिछले कुछ दिनों में यह शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता, युवाओं के भविष्य, सरकार की जवाबदेही और विपक्ष की राजनीति का सबसे बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही विपक्ष ने इसे संसद के भीतर प्रमुख मुद्दा बनाया, जबकि देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने प्रदर्शन तेज कर दिए। सरकार के सामने एक साथ संसद चलाने, छात्रों का भरोसा बहाल करने और परीक्षा प्रणाली में सुधार का दबाव पैदा हो गया।

इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष

कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) तथा अन्य विपक्षी दलों ने शुक्रवार को भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का तर्क है कि परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी चूक की नैतिक जिम्मेदारी तय किए बिना केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो सकती। विपक्षी नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा दोनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए लगातार नारेबाजी की, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। संसद का पहला सप्ताह पूरी तरह इस विवाद की भेंट चढ़ गया।

वांगचुक ने तोड़ा 26 दिन का अनशन

लगातार 26 दिन से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बातचीत और सरकार की ओर से आगे भी वार्ता जारी रखने के आश्वासन के बाद उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिह की मौजूदगी में जूस पीकर अनशन तोड़ा। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त होने का अर्थ आंदोलन का अंत नहीं है।

सरकार-आंदोलनकारियों के बीच वार्ता

सरकार और आंदोलनकारी सीजेपी के प्रतिनिधियों के बीच शुक्रवार को भी बातचीत जारी रही। सूत्रों के अनुसार सरकार ने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जबकि कुछ मामलों में और समय मांगा है। आंदोलनकारी पक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा सुधार, छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों और अन्य मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहता है। सरकार का कहना है कि संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश जारी है।

प्रधानमंत्री का आधी रात का संदेश

आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सीधे छात्रों को संबोधित किया। देर रात जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा, “पेपर लीक कोई साधारण मामला नहीं है। यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और परीक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाने के लिए कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार कानून को और सख्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कानून होगा और कठोर

प्रधानमंत्री के संदेश के कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार संगठित पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की खरीद-बिक्री, डिजिटल हैकिंग और परीक्षा माफिया से जुड़े मामलों में अधिकतम 10 वर्ष की कैद तथा 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए यह संशोधन लाया जा रहा है।

एनटीए के 47 कर्मी बर्खास्त

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में व्यापक प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 47 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करने का निर्णय लिया गया है। एजेंसी की कार्यप्रणाली की समीक्षा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संस्थागत सुधारों पर भी काम किया जा रहा है।

पुलिस कार्रवाई पर भी घमासान

छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन चलाने जैसी पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद गहरा गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने घायल छात्रों का हवाला देते हुए प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी शिकायतों का समाधान किया जाना चाहिए।

संसद का पहला हफ्ता गया बेकार

सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। विपक्ष ने पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और फिर परीक्षा प्रणाली पर व्यापक चर्चा की मांग की। संसद का पहला सप्ताह लगभग पूरी तरह राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ गया।

ये है अड़चन

सरकार की कोशिश है कि कानून को और कठोर बनाकर, एनटीए में सुधार लागू कर और आंदोलनकारी संगठनों से बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकाला जाए। दूसरी ओर विपक्ष और आंदोलनकारी संगठन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को मुख्य मुद्दा बनाए हुए हैं। ऐसे में अगले कुछ दिन इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे। इस बीच ये आंदोलन देश व्यापी होता जा रहा है। महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर में भी इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को प्रदर्शन हुए।

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