समझौते के बाद जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल देखने को मिला। छात्रों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई, तिरंगा लहराया और राष्ट्रगान गाया। सीजेपी नेतृत्व ने इसे “छात्रों और लोकतंत्र की जीत” बताया, जबकि सरकार ने कहा कि संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए समाधान निकाला गया है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये कहा गया
सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बातचीत के कई दौर के बाद सहमति बनी। सरकार की ओर से कहा गया कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक रोकने के लिए कानूनी तथा संस्थागत सुधार किए जाएंगे। सीजेपी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाना नहीं, बल्कि छात्रों को न्याय दिलाना था। संगठन ने समर्थकों से शांतिपूर्ण ढंग से धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने की अपील की।
सरकार ने क्या-क्या माना
समझौते के तहत सरकार ने परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया तेज करने, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ाने पर सहमति जताई। इससे पहले केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था की दिशा में भी कदम बढ़ा चुकी थी।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा
लगातार बढ़ते राजनीतिक और जनदबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों का हित सर्वोपरि है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए उन्होंने यह निर्णय लिया है। इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को सौंपने का निर्णय लिया।
मेट्रो स्टेशन खुले, सामान्य हुई आवाजाही
आंदोलन समाप्त होने की घोषणा के बाद दिल्ली में सुरक्षा संबंधी कई प्रतिबंध हटाए गए। आंदोलन के दौरान बंद किए गए मेट्रो स्टेशन फिर से खोल दिए गए और सामान्य सेवाएं बहाल कर दी गईं। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आंदोलन के समापन के बाद छात्रों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने विशेष प्रबंध किए।
36 दिन के आंदोलन ने बदला राजनीतिक माहौल
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद से शुरू हुआ आंदोलन कुछ ही सप्ताह में राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया। सोशल मीडिया पर शुरू हुए अभियान ने जंतर-मंतर के धरने का रूप लिया। बाद में पद्मश्री सोनम वांगचुक के आमरण अनशन, विपक्ष के समर्थन और संसद में लगातार गतिरोध ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया। आंदोलन के दौरान देश के कई शहरों में प्रदर्शन हुए और संसद का मानसून सत्र भी प्रभावित रहा।
सीजेपी ने कहा
सीजेपी नेताओं ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की पहली बड़ी सफलता है, लेकिन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधार की लड़ाई जारी रहेगी। संगठन ने कहा कि यदि वादों पर अमल नहीं हुआ तो भविष्य में फिर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
सरकार का संदेश
केंद्र सरकार ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करना उसकी प्राथमिकता है। सरकार ने छात्रों से शांति बनाए रखने और सुधार प्रक्रिया में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक संस्थागत बदलाव किए जाएंगे।
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