स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इसकी गूंज ब्रिटेन तक पहुंच गई है। लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग और अन्य पाकिस्तानी राजनयिक प्रतिष्ठानों के बाहर बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शन कर इस कार्रवाई की निंदा की और अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग उठाई।
ये है पूरा विवाद
विवाद की शुरुआत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर हुई। स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए क्षेत्र की राजनीतिक संरचना और जनप्रतिनिधित्व को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने व्यापक आंदोलन शुरू किया था।
आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान प्रशासन ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया और उसके कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, कोटली और अन्य शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध मार्च, धरने और बंद के आह्वान ने देखते ही देखते जनआंदोलन का रूप ले लिया।
सड़कों पर संघर्ष, गोलियों की गूंज
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय संगठनों के अनुसार रावलकोट सहित कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं। आरोप है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया गया और कई स्थानों पर सीधे गोली चलाने की घटनाएं भी हुईं। गोलीबारी के बाद अस्पतालों में घायलों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय संगठनों ने मृतकों की संख्या 30 से अधिक और घायलों की संख्या 200 के करीब बताई है। संचार सेवाओं पर प्रतिबंध और स्वतंत्र मीडिया की सीमित पहुंच के कारण वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
इंटरनेट बंद, गिरफ्तारियां तेज
हिंसा के बाद प्रशासन ने कई इलाकों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दीं। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और आंदोलनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बताते हुए चिंता व्यक्त की है।
ब्रिटेन में भी फूटा गुस्सा
पीओके की घटनाओं ने ब्रिटेन में बसे कश्मीरी समुदाय को भी आंदोलित कर दिया है। लंदन में पाकिस्तानी उच्चायोग के सामने प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मृतकों को श्रद्धांजलि दी। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि गोलीबारी की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच कराई जाए और दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए। ब्रिटेन के कई सांसदों ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए वहां की सरकार से हस्तक्षेप करने और स्थिति पर नजर रखने की मांग की है।
भारत ने साधा निशाना
भारत ने भी घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय पक्ष का कहना है कि पीओके में लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों का लगातार हनन हो रहा है तथा पाकिस्तान वहां के लोगों की आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
सिर्फ सीटों का नहीं, व्यापक असंतोष का विस्फोट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान आंदोलन केवल आरक्षित सीटों के विवाद का परिणाम नहीं है। पीओके में लंबे समय से महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट, करों में वृद्धि, राजनीतिक अधिकारों की कमी और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर असंतोष बढ़ता रहा है। हालिया घटनाओं ने इसी दबे हुए गुस्से को विस्फोटक रूप दे दिया है।
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