हालांकि, बयान सामने आते ही कांग्रेस के भीतर ही इस पर सवाल उठने लगे। कई नेताओं ने इसे पार्टी की वैचारिक लाइन से अलग बताया, जबकि भाजपा ने इसे कांग्रेस की “दोहरी राजनीति” करार देते हुए हमले तेज कर दिए।
बढ़ते विवाद के बीच दिग्विजय सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य RSS के विचारधारा का समर्थन करना नहीं, बल्कि संगठनात्मक ढांचे की चर्चा करना था। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस एकजुट है और भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
मणिकम टैगोर की तीखी प्रतिक्रिया
इसी बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दिग्विजय सिंह के बयान के संदर्भ में प्रतिक्रिया देते हुए RSS की तुलना आतंकी संगठन अल-कायदा से कर दी। टैगोर ने कहा कि RSS नफरत और विभाजन फैलाने वाला संगठन है और कांग्रेस को उससे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।
टैगोर की इस टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। भाजपा ने इस बयान को राष्ट्रवादी संगठनों का अपमान बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, वहीं कांग्रेस के भीतर भी कई नेताओं ने इस तुलना को अत्यधिक और अनुचित बताया।
कांग्रेस के भीतर उभरे दो स्पष्ट रुख
इस पूरे विवाद के बाद कांग्रेस के भीतर दो स्पष्ट धाराएं उभरकर सामने आई हैं। एक धड़ा मानता है कि संगठनात्मक मजबूती जैसे मुद्दों पर चर्चा करना गलत नहीं है और दिग्विजय सिंह की टिप्पणी को जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया। वहीं दूसरा धड़ा टैगोर के बयान को कांग्रेस की वैचारिक स्पष्टता के अनुरूप मानते हुए RSS के साथ किसी भी तरह की तुलना या सराहना को पूरी तरह खारिज करता है।
कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसे विरोधाभासी बयान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और भाजपा को कांग्रेस पर हमला करने का मौका देते हैं।
नेतृत्व के सामने अनुशासन की चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कांग्रेस की पुरानी समस्या—आंतरिक मतभेदों का सार्वजनिक होना—को एक बार फिर उजागर करता है। ऐसे समय में जब पार्टी संगठनात्मक पुनर्गठन और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है, वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद नेतृत्व के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है, लेकिन पार्टी के भीतर संवाद और नियंत्रण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सियासी असर
दिग्विजय सिंह के बयान से शुरू हुआ यह विवाद मणिकम टैगोर की टिप्पणी के बाद कांग्रेस की अंदरूनी वैचारिक खाई को सामने ले आया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इसे संवाद के जरिए सुलझाता है या सख्त अनुशासन के माध्यम से पार्टी लाइन स्पष्ट करता है।
