वित्त मंत्री ने नौवीं बार संसद में (Union Budget) पेश करते हुए कहा कि गैर ऋण प्राप्तियां और कुल व्यय क्रमश: 36.5 लाख करोड और 53.5 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है। 2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
17 जीवनरक्षक दवाएं होंगी सस्ती
बजट की सबसे अहम स्वास्थ्य संबंधी घोषणा के तहत कैंसर, डायबिटीज और अन्य गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली 17 जीवनरक्षक दवाओं के आयात को कस्टम ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला किया गया है, जिससे इन बीमारियों के इलाज की लागत घटने की उम्मीद जताई जा रही है।
रक्षा बजट बढ़ा
मौजूदा वैश्विक माहौल को देखते हुए भारत ने अपने रक्षा बजट में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है।साल 2026-27 के वित्त वर्ष के लिए रक्षा मंत्रालय के बजट में तक़रीबन 15 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है. इस वित्तीय वर्ष में रक्षा बजट 7,84,678 करोड़ रुपये का है जबकि पिछले साल 6,81,210 करोड़ रुपये था।
आर्थित स्थिरता पर जोर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार का फोकस विकास, निवेश और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर है। बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए करीब ₹7.8 लाख करोड़, MSME सेक्टर के लिए ₹10,000 करोड़ का विशेष कोष, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, कृषि में उच्च-मूल्य फसलों और तकनीक आधारित खेती तथा शिक्षा-कौशल विकास के लिए बढ़े हुए आवंटन का प्रावधान किया गया है।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
कर मोर्चे पर सरकार ने आयकर स्लैब और कॉरपोरेट टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। नई कर व्यवस्था को ही प्राथमिक ढांचा बनाए रखा गया है। अप्रत्यक्ष करों में केवल चुनिंदा क्षेत्रों में संशोधन किए गए हैं, जिनमें जीवनरक्षक दवाओं के आयात पर कर छूट प्रमुख कदम माना जा रहा है।
उद्योग जगत और व्यापारिक संगठनों ने इसे निवेश-अनुकूल और विकासोन्मुख बताया है, वहीं शेयर बाजार में बजट के बाद उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। दूसरी ओर, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने बजट को फीका और मध्यम वर्ग, बेरोजगारी व महंगाई से जुड़े सवालों पर निराशाजनक करार दिया है।
मिलीजुली प्रतिक्रिया
नौकरी पेशा वर्ग जहां टैक्स राहत न मिलने को लेकर नाराज़गी जताई गई, वहीं गंभीर बीमारियों की दवाओं पर कर छूट के फैसले को आम लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम बताया। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम बता रही है, जबकि विपक्ष और आम जनता का एक वर्ग इसे आम आदमी की जेब पर तत्काल असर डालने में नाकाम मान रहा है। बजट पर सियासी और आर्थिक बहस आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत हैं।
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