महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: बंगाल से तमिलनाडु तक भाजपा का ‘महिला कार्ड’

चुनावी राज्यों में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की चुनावी रैली में इस मुद्दे को केंद्र में रखते हुए तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी महिलाओं को उनका अधिकार नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि संसद में विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने “देश की बेटियों के साथ अन्याय” किया है।

पश्चिम बंगाल में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते पीएम मोदी
Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: April 19, 2026 11:59 pm

मोदी ने संसद में महिला आरक्षण विधेयक को गिरने के लिए टीएमसी और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण को भाजपा की प्राथमिकता बताते हुए इसे सीधे-सीधे चुनावी मुद्दा बना दिया।

प्रधानमंत्री ने रैली में यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार महिलाओं के लिए आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े बड़े कदम उठाने को प्रतिबद्ध है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने महिला मतदाताओं को साधने के लिए कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता जैसे प्रस्तावों का भी जिक्र किया, जिससे यह साफ हुआ कि भाजपा इस वर्ग को निर्णायक वोट बैंक के रूप में देख रही है।

इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तमिलनाडु में डीएमके सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने मिलकर महिला आरक्षण विधेयक को पारित नहीं होने दिया और अब जनता को गुमराह कर रहे हैं। शाह ने इसे “महिलाओं के हक के खिलाफ साजिश” बताते हुए कहा कि भाजपा इस मुद्दे को देशभर में लेकर जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संसद में विधेयक पारित न हो पाने के बाद भाजपा ने इसे चुनावी नैरेटिव में बदल दिया है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में महिला मतदाता बड़ी संख्या में हैं, ऐसे में पार्टी इस मुद्दे को भावनात्मक और अधिकार आधारित अभियान के रूप में पेश कर रही है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा जानबूझकर इस विधेयक को डिलिमिटेशन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़कर लागू करने में देरी कर रही है और अब चुनाव से पहले इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। हालांकि भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए खुद को महिलाओं के अधिकारों की सबसे बड़ी पैरोकार बता रही है।

चुनावी मैदान में जिस तरह से यह मुद्दा उभरा है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में महिला आरक्षण विधेयक की नाकामी का मुद्दा सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक बन सकता है।

ये भी पढ़ें :-दो-तिहाई के अभाव में गिरा महिला आरक्षण विधेयक: बहुमत के बावजूद 352 का आंकड़ा नहीं छू सकी सरकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *