AAP में बड़ी टूट : राघव चड्ढा सहित राज्यसभा के 7 सांसद बीजेपी में शामिल, संसद से पंजाब तक असर

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) समेत राज्यसभा के 7 आप नेताओं के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जाने की खबरों ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। यह घटनाक्रम केवल दलबदल की सामान्य खबर नहीं, बल्कि संसद में आप (AAP) की ताकत, दल-बदल कानून और भविष्य की राजनीति पर दूरगामी असर डालने वाला माना जा रहा है। ये नेता हैं राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, विक्रम साहनी और राजेंद्र गुप्ता।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: April 25, 2026 12:24 am

संसदीय गणित पर नजर डालें तो AAP की स्थिति फिलहाल सीमित लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लोकसभा (Lok Sabha) में पार्टी के तीन सांसद हैं, जो सभी पंजाब से आते हैं, जबकि राज्यसभा में उसकी संख्या 10 है। यही वजह है कि राज्यसभा में संभावित टूट को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है।

दरअसल, पूरे विवाद का केंद्र “दो-तिहाई” का गणित है। दल-बदल कानून के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होकर किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल जाती है। AAP के 10 राज्यसभा सांसदों के लिहाज से यह संख्या 7 बैठती है। यही कारण है कि सात सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के दावे को राजनीतिक रूप से निर्णायक माना जा रहा है।

यदि यह दावा सही साबित होता है और सात सांसद एक साथ पाला बदलते हैं, तो AAP को राज्यसभा में बड़ा झटका लगेगा। उसकी संख्या घटकर मात्र तीन रह जाएगी और संसद के उच्च सदन में उसकी प्रभावी भूमिका लगभग समाप्त हो सकती है। दूसरी ओर, इस स्थिति में दलबदल करने वाले सांसदों को कानूनी संरक्षण मिल सकता है और इसे “विलय” की श्रेणी में रखा जा सकता है, जिससे उनकी सदस्यता सुरक्षित रहेगी। इससे बीजेपी को भी उच्च सदन में संख्या बल की दृष्टि से मजबूती मिलेगी।

इसके उलट, यदि दलबदल करने वालों की संख्या सात से कम रहती है, तो पूरा परिदृश्य बदल जाएगा। ऐसी स्थिति में यह “विलय” नहीं बल्कि दलबदल माना जाएगा और संबंधित सांसदों पर अयोग्यता की तलवार लटक सकती है। इससे AAP को सीमित नुकसान होगा, लेकिन उसका संसदीय अस्तित्व बरकरार रहेगा और बीजेपी को भी अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिल पाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह संकट अचानक नहीं उभरा है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नेतृत्व में पार्टी के भीतर लंबे समय से केंद्रीकरण और आंतरिक लोकतंत्र की कमी के आरोप लगते रहे हैं। हाल के महीनों में स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) से जुड़ा विवाद भी खुलकर सामने आया, जिसने संगठन के भीतर असंतोष को सार्वजनिक रूप दिया। इसके साथ ही राघव चड्ढा को लेकर साइडलाइन किए जाने और नेतृत्व से मतभेद की चर्चाओं ने इस असंतोष को और गहरा किया।

इस घटनाक्रम का सबसे सीधा असर पंजाब (Punjab) की राजनीति पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जहां AAP की सरकार है। हालांकि तत्काल सरकार पर कोई खतरा नहीं दिखता, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर यह संकट पार्टी के मनोबल को प्रभावित कर सकता है। आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर विपक्ष को भी AAP पर हमले का नया मुद्दा मिल सकता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) के नेतृत्व पर भी दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

इस बीच AAP ने पूरे घटनाक्रम को बीजेपी की ओर से “ऑपरेशन लोटस” करार देते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह नेताओं का स्वैच्छिक निर्णय है और AAP के भीतर बढ़ते असंतोष का परिणाम है।

फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दलबदल करने वाले सांसदों की वास्तविक संख्या क्या रहती है। सात का आंकड़ा पार होने पर यह AAP के लिए अब तक का सबसे बड़ा संसदीय झटका साबित हो सकता है, जबकि इससे कम संख्या की स्थिति में संकट तो रहेगा, लेकिन पार्टी के अस्तित्व पर तात्कालिक खतरा नहीं होगा।

स्पष्ट है कि यह मामला केवल संख्या का नहीं, बल्कि AAP के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व शैली और राष्ट्रीय राजनीति में उसकी भूमिका की अग्निपरीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह घटनाक्रम एक अस्थायी राजनीतिक झटका है या फिर पार्टी की दिशा और दशा बदलने वाला निर्णायक मोड़।

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3 thoughts on “AAP में बड़ी टूट : राघव चड्ढा सहित राज्यसभा के 7 सांसद बीजेपी में शामिल, संसद से पंजाब तक असर

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