यह बातें शुक्रवार को, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में, डॉ. शंकर प्रसाद के साहित्य पर केंद्रित पुस्तक ‘जीवन पथ पर अविराम चला’ का लोकार्पण करते हुए बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डा प्रेम कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि लोकार्पित पुस्तक से डा शंकर के जीवन,जीवनादर्श और उनके संघर्षपूर्ण जीवन की प्रेरणादायी स्थितियों से समाज को परिचित कराती है।
समारोह के मुख्य अतिथि और बिहार के निवर्तमान कला-संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि जिसके जीवन में साहित्य आ जाए, उसका जीवन बदल जाता है। डा शंकर प्रसाद के जीवन में घुला साहित्य समाज के लिए प्रेरणा दायी है। इनके स्वर में जो मिठास है वह किसी को भी आकर्षित करती है।
बिहार विधान परिषद के सदस्य और सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ डा राज वर्धन आज़ाद ने अपनी चार पंक्तियों से कि “जीवन पथ पर अविराम चला/ सुख दुःख लेकर सुबह शाम चला/ कभी नाम चला कभी सदनाम चला/ जब भी चला केवल निष्काम चला”, डा शंकर प्रसाद के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डा शंकर आवाज़ की दुनिया के जादूगर हैं।
लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि डा शंकर का वैविध्यपूर्ण जीवन और जीवनानुभूति की पूँजी से अर्जित भाव-संपदा से संपन्न यह पुस्तक, जिसका संपादन विद्वान साहित्यकार निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने किया है, अत्यंत मूल्यवान, प्रेरक और पठनीय है।
पद्मश्री विमल जैन, पटना विज्ञान महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डा अतुल आदित्य पाण्डेय, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा, विभा रानी श्रीवास्तव, डा पुष्पा जमुआर, डा शालिनी पाण्डेय, डा मीना कुमारी परिहार, डा सीमा रानी, डा एम के मधु, डा ऋचा वर्मा, ईं अशोक कुमार, शंकर कैमूरी, नमिता लोहानी ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए।
इस अवसर पर डा प्रेम कुमार ने कवि ओम् प्रकाश पाण्डेय ‘प्रकाश’, नित्यानंद सिंह, डा अरुण दयाल, डा संजय कुमार सिंह, दयाशंकर राज पुरोहित, आराधना प्रसाद, शमा कौसर ‘शमा’, पंकज कुमार वसंत, डा प्रियंवदा मिश्र, जय कुमार, डा धीरज सिन्हा, अमर ज्योति झा, अजय झा को सम्मानित किया।
अतिथियों का स्वागत डा पुरुषोत्तम कुमार तिवारी ने, मंच का संचालन कवि सुनील कुमार दूबे ने तथा धन्यवाद-सम्मेलन के अर्थ मंत्री कुमार अनुपम ने किया।
समारोह में, ईं बाँके बिहारी साव, आनंद मनीष, इन्दु भूषण सहाय, कृष्ण रंजन सिंह, उत्पल कुमार, राजेश शुक्ल, उमाकांत ओझा, कृष्ण रंजन सिंह, तारकेश्वर पाण्डेय, भास्कर त्रिपाठी, सुमन कुमार, बिन्देश्वर प्रसाद आदि बड़ी संख्या में सुधीजन और साहित्यकार उपस्थित थे।
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