DIFF- 2026 के समापन के अवसर पर प्रतियोगिता खंड में चयनित उत्कृष्ट फिल्मों को पुरस्कार प्रदान किए गए। उन्हें ऋतुपर्णा सेनगुप्ता ने पुरस्कार प्रदान किए। भारत विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित और द्वारा निर्देशित फिल्म “ए न्यू पोस्टबॉक्स : टेल्स फ्रॉम पार्टीशन” को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। फिल्म ने विभाजन की मानवीय त्रासदी और स्मृतियों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत कर दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया।
इस वर्ष आयोजित फिल्म महोत्सव में विश्व सिनेमा की व्यापक भागीदारी देखने को मिली। महोत्सव के दौरान दुनिया के 51 देशों तथा भारत के 21 राज्यों की कुल 177 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। विविध भाषाओं, संस्कृतियों और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्त करती इन फिल्मों ने दर्शकों को वैश्विक सिनेमा की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।
महोत्सव में रूस, चीन और अफ्रीकी देशों को ‘फोकस कंट्री’ के रूप में विशेष स्थान दिया गया। इन देशों की फिल्मों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सिनेमाई विमर्शों ने अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा प्रदान की।
फिल्म महोत्सव के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण परिचर्चाएँ, संवाद सत्र और विशेष पैनल चर्चाएँ भी आयोजित की गईं। इसी क्रम में आईजीएनसीए द्वारा आयोजित विशेष पैनल चर्चा “मेकिंग फिल्म्स इज ईजी, सेलिंग देएम इज वॉर” (Making Films is Easy, Selling Them is War) ने फिल्मकारों, शोधकर्ताओं और सिनेमा से जुड़े विद्यार्थियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। फिल्मों के निर्माण से लेकर वितरण और दर्शकों तक पहुँचाने की चुनौतियों पर केंद्रित इस चर्चा में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी, आईआईसीएस, नई दिल्ली के डीन अकादमिक सलीम आरिफ़, प्रसिद्ध रंगकर्मी तथा अस्मिता थिएटर ग्रुप के अरविंद गौर तथा मोशन पिक्चर्स एसोसिएशन के महासचिव जोगिंदर महाजन ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रीमा गौतम ने किया।
समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव केवल फिल्मों का आयोजन नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों, संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के वैश्विक उत्सव का मंच बन चुका है। महोत्सव ने भारतीय और विश्व सिनेमा के बीच संवाद, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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