DIFF 2026 के तहत आयोजित इस विशेष सत्र का उद्देश्य भारत के समृद्ध अभिलेखीय (आर्काइव) खजाने को सिनेमा के माध्यम से पुनर्जीवित करने की संभावनाओं पर विचार करना था। चर्चा में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत के पास अपार अभिलेखीय संपदा उपलब्ध है, लेकिन उसका सिनेमाई रूपांतरण अभी भी सीमित है। चर्चा में प्रतिष्ठित फिल्मकार बप्पा रे, उत्पल बोरपुजारी, लेखक एवं फिल्म इतिहासकार इक़बाल रिज़वी ने अपने विचार साझा किए। सत्र का संचालन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र के प्रमुख अनुराग पुनेठा ने किया।
चर्चा के दौरान पैनलिस्टों ने निम्न प्रमुख बिंदुओं पर गहन विमर्श किया – आईजीएनसीए जैसी संस्थाओं की अभिलेख संरक्षण में भूमिका, ऐतिहासिक अभिलेखों को प्रभावी सिनेमाई कथाओं में रूपांतरित करने की प्रक्रिया और विभाजन, जनजातीय इतिहास और मौखिक परंपराओं जैसे विषयों की प्रासंगिकता। पैनलिस्टों ने इस बात पर भी जोर दिया कि अभिलेख केवल दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि वे जीवंत कथाएं हैं, जिन्हें सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। इसके लिए फिल्मकारों, इतिहासकारों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। यह सत्र फिल्म महोत्सव के महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक रहा, जिसने अभिलेखीय विरासत और समकालीन सिनेमा के बीच संवाद की नई संभावनाओं को रेखांकित किया।
इससे पूर्व भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े पुरस्कार दादासाहब फाल्के से सम्मानित फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन ने आईजीएनसीए द्वारा लगाई गई एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में वे विज्ञापन शामिल हैं, जो फिल्म स्टारों तथा लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी, मुकेश, बेगम अख्तर, गीता दत्त, आशा भोंसले, महेंद्र कपूर जैसे महान गायकों ने 1950 से 1990 के दशक में प्रिंट माध्यमों के लिए किया था। प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए अडूर गोपालकृष्णन ने कहा, यह अपनी तरह की अनूठी प्रदर्शनी है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी दुर्लभ प्रिंट विज्ञापनों के माध्यम से बीते युग की मशहूर नायिकाओं को एक साथ प्रस्तुत करती है और उस समय की दृश्य संस्कृति की एक आकर्षक झलक प्रस्तुत करती है।
यह प्रदर्शनी आईजीएनसीए के फिल्म आर्काइविगं शृंखला का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है, जो सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की दूरदृष्टि का परिणाम है। यह परियोजना कुछ वर्ष पूर्व डॉ. सच्चिदानंद जोशी के निर्देशन में शुरू हुई। उनका मानना है कि फिल्में व विज्ञापन भी कला का एक महत्त्वपूर्ण अंग हैं तथा अपने समय और समाज का चित्रण करते हैं, इसलिए उनका अभिलेखन भी उतना ही महत्त्वूर्ण है, जितना अन्य विधाओं का। शाम में चंडीगढ़ स्थित चित्कारा विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के छात्रों की पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन आईजीएनसीए के मीडिया विभाग के प्रमुख अनुराग पुनेठा द्वारा किया गया।
दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल (DIFF 2026) के तीसरे दिन आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर द्वारा ‘डॉक्यूमेंट्रीज की दृष्टि : क्या डॉक्यूमेंट्री सिनेमा निष्पक्ष होता है और प्रभावशाली नैरेटिव का माध्यम है?’ विषय पर शाम 4 बजे पैनल चर्चा का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, सुबह 10.30 बजे आईजीएनसीए द्वारा निर्मित डॉक्युमेंट्री फिल्म- ‘अ न्यू पोस्ट बॉक्स’ का प्रदर्शन भी किया जाएगा।
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