भारतीय मुक्केबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। महिला मुक्केबाजों ने सबसे अधिक प्रभावित किया और एक के बाद एक फाइनल जीतकर स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी। प्रीति पवार, जैसमीन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। इसके अलावा पुरुष वर्ग में सचिन सिवच और सचिन पंघाल ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किए। यह पहला अवसर है जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी एक संस्करण में बॉक्सिंग से 7 स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।
बॉक्सिंग के अलावा जूडो, पैरा एथलेटिक्स और एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। खासकर जूडो में अस्मिता डे ने राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए पहली बार गोल्ड मेडल जीता। पैरा एथलीटों ने रिकॉर्ड पदक जीतकर अभियान को नई गति दी,। इन प्रदर्शनों के दम पर भारत ने अंतिम दिन से पहले ही खुद को शीर्ष चार देशों में स्थापित कर दिया।
भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ग्लासगो खेलों में भारतीय दल अपेक्षाकृत छोटा है और इस बार शूटिंग, कुश्ती तथा बैडमिंटन जैसे पारंपरिक पदक दिलाने वाले खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाते हुए पदक तालिका में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
अब निगाहें अंतिम दिन के मुकाबलों पर हैं। यदि भारतीय खिलाड़ी शेष स्पर्धाओं में भी पदक जीतने में सफल रहते हैं तो भारत के स्वर्ण और कुल पदकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। हालांकि अंतिम दिन से पहले ही भारतीय दल ने यह संदेश दे दिया है कि सीमित खेलों में भी वह कॉमनवेल्थ खेलों की बड़ी ताकत बना हुआ है।
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