पेपर लीक, कथित “गेस पेपर” गिरोह और परीक्षा केंद्रों पर अनियमितताओं के आरोपों से घिरी NEET परीक्षा को लेकर पिछले कई दिनों से देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बीच केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया। शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा पेन-पेपर प्रणाली में बड़े स्तर पर सुरक्षा खामियां सामने आई हैं, जिन्हें देखते हुए परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव अपरिहार्य हो गया था।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कहा कि छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से सुरक्षित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष से NEET को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित किया जाएगा ताकि प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
सरकार की घोषणा के साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का कार्यक्रम जारी कर दिया है। सूत्रों के अनुसार परीक्षा के लिए छात्रों को नया आवेदन नहीं करना होगा तथा पुराने पंजीकरण को ही मान्य रखा जाएगा। नए प्रवेश पत्र 14 जून तक जारी किए जाने की संभावना है।



सरकार ने पहली बार स्वीकार की बड़ी चूक
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जा रही है कि केंद्र सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर सेंध लगी थी। जांच एजेंसियों की रिपोर्टों में यह सामने आया कि कथित “गेस पेपर” के नाम पर वास्तविक प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कई राज्यों में पहुंच चुके थे। बिहार, राजस्थान, झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर का संगठित परीक्षा घोटाला बना दिया।
सूत्रों के अनुसार शिक्षा मंत्रालय को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक पेन-पेपर मॉडल में प्रश्नपत्रों की छपाई, परिवहन और केंद्रों तक वितरण की प्रक्रिया सबसे कमजोर कड़ी साबित हुई। इसी कारण सरकार ने ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को दीर्घकालिक समाधान के रूप में स्वीकार किया है।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अमल
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में NEET जैसी विशाल परीक्षाओं को चरणबद्ध तरीके से CBT या हाइब्रिड मोड में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी। समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि परीक्षा कई चरणों और शिफ्टों में आयोजित की जाए तथा NTA के भीतर स्वतंत्र साइबर सुरक्षा और निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।
सरकार अब इन सिफारिशों को तेजी से लागू करने की तैयारी में है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ महीनों में NTA के प्रशासनिक ढांचे, प्रश्नपत्र निर्माण प्रणाली और परीक्षा केंद्रों की मान्यता प्रक्रिया में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं।
विरोध प्रदर्शनों ने बढ़ाया दबाव
NEET विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से देशभर में छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दिल्ली में कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने प्रदर्शन किया, जबकि केरल में वामपंथी छात्र संगठन SFI ने सड़कों पर उतरकर परीक्षा रद्द करने की मांग की। सोशल मीडिया पर भी लाखों छात्रों और अभिभावकों ने परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
ऑनलाइन परीक्षा को लेकर नई चिंताएं भी
हालांकि सरकार के फैसले का एक बड़ा वर्ग स्वागत कर रहा है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों के बीच नई आशंकाएं भी उभर रही हैं। छात्रों का कहना है कि ऑनलाइन परीक्षा के लिए पर्याप्त तकनीकी ढांचा, कंप्यूटर सुविधा और स्थिर इंटरनेट उपलब्ध कराना सबसे बड़ी चुनौती होगी। कई शिक्षा विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि देशभर में समान स्तर की डिजिटल तैयारी सुनिश्चित किए बिना पूरी तरह CBT मोड लागू करना आसान नहीं होगा।
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