कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की दमदार वापसी: 11 स्वर्ण के साथ फिर चौथे स्थान पर, बॉक्सिंग में पहली बार 5 गोल्ड का इतिहास

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के अंतिम दिन से पहले भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 स्वर्ण पदकों के साथ पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल कर लिया है। ब्रिटेन के स्कॉटलैंड स्थित शहर ग्लास्गो में इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही भारत ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह एक बार फिर शीर्ष चार देशों में जगह बना ली है। भारतीय दल की इस सफलता की सबसे बड़ी कहानी बॉक्सिंग रिंग से निकली, जहां भारत ने पहली बार एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में पांच स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। विभिन्न मुकाबलों में भारतीय मुक्केबाजों के दबदबे ने न केवल स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि पदक तालिका में भारत को भी मजबूती से चौथे स्थान तक पहुंचा दिया।

बॉक्सिंग में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतने के बाद प्रीति पवार
Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: August 2, 2026 12:10 am

भारतीय मुक्केबाजों ने पूरे टूर्नामेंट में आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। महिला मुक्केबाजों ने सबसे अधिक प्रभावित किया और एक के बाद एक फाइनल जीतकर स्वर्ण पदकों की झड़ी लगा दी। प्रीति पवार, जैसमीन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास और अरुंधति चौधरी ने अपने-अपने भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। यह पहला अवसर है जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी एक संस्करण में बॉक्सिंग से पांच स्वर्ण पदक हासिल किए हैं।

बॉक्सिंग के अलावा जूडो, पैरा एथलेटिक्स और एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। पैरा एथलीटों ने रिकॉर्ड पदक जीतकर अभियान को नई गति दी, जबकि जूडो में भी भारत ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की। इन प्रदर्शनों के दम पर भारत ने अंतिम दिन से पहले ही खुद को शीर्ष चार देशों में स्थापित कर दिया।

भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ग्लासगो खेलों में भारतीय दल अपेक्षाकृत छोटा है और इस बार शूटिंग, कुश्ती तथा बैडमिंटन जैसे पारंपरिक पदक दिलाने वाले खेल कार्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाते हुए पदक तालिका में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

अब निगाहें अंतिम दिन के मुकाबलों पर हैं। यदि भारतीय खिलाड़ी शेष स्पर्धाओं में भी पदक जीतने में सफल रहते हैं तो भारत के स्वर्ण और कुल पदकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। हालांकि अंतिम दिन से पहले ही भारतीय दल ने यह संदेश दे दिया है कि सीमित खेलों में भी वह कॉमनवेल्थ खेलों की बड़ी ताकत बना हुआ है।

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