स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार एक महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिलेगा। लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन होगा। प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण और राष्ट्र को संबोधन के बाद करीब 2,500 एनसीसी कैडेट और ‘मेरा भारत’ स्वयंसेवक राष्ट्रीय गीत का गायन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान होगा। समारोह में मौजूद लोग भी ‘वंदे मातरम्’ के गायन में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण के साथ स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गनों से 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय ध्वज फहराने में सहयोग करेंगी। इसके बाद वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर समारोह स्थल पर पुष्पवर्षा करेंगे। इनमें से एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम्’ अंकित ध्वज लेकर उड़ेगा।
समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी भी व्यापक होगी। करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 1,500 से अधिक लोग पारंपरिक परिधानों में समारोह में शामिल होंगे। लाल किले के सामने ज्ञान पथ पर एनसीसी कैडेट और ‘मेरा भारत’ के स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाकर राष्ट्रीय गीत के गायन में हिस्सा लेंगे।
इस वर्ष के आयोजन में युवा शक्ति को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ना विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। सरकार ने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवाओं की ऊर्जा, आकांक्षाओं और योगदान को समारोह के केंद्र में रखा है। ऐसे में प्रधानमंत्री के संबोधन में सरकार के विकास एजेंडे, युवाओं की भूमिका और 2047 के भारत के विजन पर विशेष जोर रहने की संभावना है।
सुरक्षा के लिहाज से भी दिल्ली में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। लाल किले और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाने के साथ यातायात के लिए विशेष प्रतिबंध लागू किए गए हैं। स्वतंत्रता दिवस समारोह का सीधा प्रसारण सुबह से किया जाएगा।
लाल किले से प्रधानमंत्री का लगातार 13वां संबोधन ऐसे समय हो रहा है जब सरकार 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को अपनी दीर्घकालिक राजनीतिक और आर्थिक दिशा के रूप में पेश कर रही है। लिहाजा इस बार का संबोधन केवल स्वतंत्रता दिवस की परंपरागत औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार के अगले दशक के विकास एजेंडे और 2047 के भारत की उसकी परिकल्पना का राजनीतिक खाका पेश करने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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