चमोली टनल हादसा: पानी और मलबे के सैलाब में फंसे 22 मजदूर में से 3 की मौत,18 बचाए गए और एक अब भी अंदर

उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय टनल के भीतर काम कर रहे 22 मजदूरों में से 18 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि तीन मजदूरों की मौत हो गई और एक अब भी टनल के भीतर फंसा है। उसे निकालने के लिए देर रात तक युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान जारी रहा।

Written By : Ramnath Rajesh | Updated on: August 14, 2026 12:05 am

उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल में अचानक पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय टनल के भीतर काम कर रहे 22 मजदूरों में से 18 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि तीन मजदूरों की मौत हो गई और एक अब भी टनल के भीतर फंसा है। उसे निकालने के लिए देर रात तक युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान जारी रहा।

तेज आवाज के बाद अचानक घुसा पानी और मलबा

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार हादसा पीपलकोटी के पास मायापुर क्षेत्र में शाम करीब सात बजे हुआ। यहां विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना के लिए टनल निर्माण का काम चल रहा है। मजदूर टनल के भीतर खुदाई के काम में लगे थे। इसी दौरान पहले तेज आवाज सुनाई दी और उसके तुरंत बाद पानी और मलबे का तेज बहाव टनल के भीतर घुस गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पानी और मलबा इतनी तेजी से अंदर आया कि मजदूरों को संभलने और बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। तेज बहाव कई मजदूरों को टनल के निकास की तरफ बहाकर ले गया, जिससे शुरुआती चरण में कई लोगों को बाहर निकालना संभव हुआ।

18 मजदूर निकाले गए, तीन की मौत

सूत्रों के अनुसार बचाव दल ने लगातार अभियान चलाकर 18 मजदूरों को बाहर निकाल लिया। घायलों को तत्काल पीपलकोटी स्थित विवेकानंद अस्पताल ले जाया गया। इनमें कम से कम दो मजदूरों की हालत गंभीर बताई गई है और उन्हें फ्रैक्चर की चोटें आई हैं। घायलों को बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की तैयारी भी की गई।

हालांकि राहत और बचाव अभियान के बीच तीन मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है। एक मजदूर अब भी टनल के भीतर फंसा हुआ है और बचाव दल उस तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

NDRF, SDRF से लेकर सेना और ITBP तक जुटे

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और SDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद NDRF, ITBP और सेना की टीमें भी बचाव अभियान में जुट गईं। मलबे और पानी के कारण टनल के भीतर पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

सूत्रों के अनुसार बचाव दल मशीनों और उपलब्ध उपकरणों की मदद से मलबा हटाने के साथ-साथ फंसे मजदूर तक पहुंचने का रास्ता बनाने में जुटा है। SDRF की टीम ने पानी भरे हिस्से तक पहुंचने के लिए अस्थायी ड्रम-बोट का भी इस्तेमाल किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री को घटनाक्रम की लगातार जानकारी दी जा रही है।

लगातार बारिश के बीच हुआ हादसा

चमोली और आसपास के पहाड़ी इलाकों में पिछले कई दिनों से बारिश हो रही है। ऐसे में पहाड़ी ढलानों से मलबा आने और अचानक जलधारा बढ़ने का खतरा बना हुआ है। शुरुआती जानकारी में टनल में पानी और मलबा आने को हादसे की तत्काल वजह माना जा रहा है।

हालांकि पानी टनल के भीतर इतनी तेजी से कैसे पहुंचा और क्या इसके पीछे भूस्खलन या टनल की किसी संरचनात्मक कमजोरी की भूमिका थी, इसकी स्थिति विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

सिलक्यारा हादसे की याद ताजा

चमोली की यह घटना उत्तराखंड के सिलक्यारा-बड़कोट टनल हादसे की भयावह याद भी ताजा कर रही है। नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की निर्माणाधीन सुरंग में 41 मजदूर फंस गए थे और उन्हें 17 दिन तक चले बेहद जटिल बचाव अभियान के बाद बाहर निकाला जा सका था।

चमोली की घटना फिलहाल उस हादसे से अलग है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में मजदूरों को कुछ ही घंटों में बाहर निकाल लिया गया। लेकिन दोनों घटनाओं ने हिमालयी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान अचानक पानी, मलबा और भूगर्भीय दबाव से पैदा होने वाले जोखिम को फिर सामने ला दिया है।

परियोजना की सुरक्षा पर उठेंगे सवाल

हादसे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल निर्माणाधीन टनल में सुरक्षा और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को लेकर उठना तय है। जांच में यह देखा जाएगा कि टनल में पानी और मलबे के अचानक प्रवेश की कोई पूर्व चेतावनी मिली थी या नहीं, जल निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और आपात स्थिति में मजदूरों को बाहर निकालने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद थी।

फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान टनल में फंसे एकमात्र मजदूर को सुरक्षित बाहर निकालने और हादसे में प्रभावित मजदूरों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर है।

ये भी पढ़ें :-आईजीएनसीए ने देहरादून में आयोजित की ‘सौहार्द’ एवं ‘सचित्र संविधान दर्शन’ प्रदर्शनी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *