NTA की समीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी गुणवत्ता जांचने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया गया। करीब 600 विशेषज्ञों को हटाने के साथ नई विशेषज्ञ टीम बनाई जा रही है। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एनटीए में 20-25 नए अधिकारियों को शामिल करने की भी तैयारी है।
चार स्तर पर जांच
नई व्यवस्था में प्रश्नपत्र परीक्षा में इस्तेमाल होने से पहले चार स्तरों पर जांचे जाएंगे। इसमें प्रश्नों की विषयगत शुद्धता, भाषा, कठिनाई का स्तर और संभावित त्रुटियों की पहचान पर जोर होगा। प्रश्नपत्र की गोपनीयता और सुरक्षा को भी पहले से ज्यादा कड़ा किया जाएगा।
NEET से शुरू हुआ संकट
एनटीए में यह बड़ा बदलाव उस विवाद की पृष्ठभूमि में हुआ है जिसने देश की परीक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया। NEET-UG में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद लाखों छात्रों और अभिभावकों ने विरोध किया। मामले की जांच आगे बढ़ी और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
इस पूरे विवाद का राजनीतिक असर भी पड़ा। परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को दी गई।
NET ने फिर बढ़ाई चिंता
NEET विवाद के बाद उम्मीद थी कि एनटीए अपनी व्यवस्था को ज्यादा मजबूत करेगा, लेकिन UGC-NET की हालिया परीक्षा में प्रश्नपत्र संबंधी गड़बड़ियों ने फिर सवाल खड़े कर दिए। जून 2026 की परीक्षा में अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला लिया गया। तीन विषयों की पुनर्परीक्षा की नौबत आने के बाद प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी जांच करने वाली व्यवस्था पर फिर सवाल उठे। इसी के बाद एनटीए में विशेषज्ञों के मौजूदा पैनल को बदलने और जांच की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा भी होगी कड़ी
एनटीए के कार्यालयों को नए परिसर में स्थानांतरित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी तैयारी है। संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी बढ़ाने के साथ कार्यालयों में सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ की तैनाती की योजना है।
भरोसा लौटाना बड़ी चुनौती
एनटीए के सामने अब चुनौती सिर्फ पेपर लीक रोकने की नहीं है। प्रश्नपत्र की गुणवत्ता, गोपनीयता और परीक्षा संचालन में भरोसा बहाल करना भी उतना ही जरूरी है। लगातार विवादों और पुनर्परीक्षाओं से छात्रों की तैयारी, समय और भविष्य प्रभावित होता है। 600 विशेषज्ञों को हटाकर नई टीम बनाना और प्रश्नपत्रों की चार स्तरों पर जांच की व्यवस्था इसी संकट से निपटने की कोशिश है। अब निगाह इस पर होगी कि नई व्यवस्था वास्तव में परीक्षा प्रणाली को कितना पारदर्शी और भरोसेमंद बना पाती है।
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