सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद यह टिप्पणी की। उन्होंने क्षेत्र की स्थिति के मद्देनजर अमेरिकी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा के संकेत भी दिए। पाकिस्तान ने गोर की टिप्पणी को “तथ्यात्मक रूप से गलत” बताते हुए खारिज किया और संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का हवाला दिया।
पहले भी भारत के करीब रहा अमेरिका
सर्जियो गोर का बयान पहली बार नहीं है जब किसी अमेरिकी अधिकारी की टिप्पणी को कश्मीर पर भारत के रुख के अनुकूल माना गया हो। हालांकि, पहले के बयान अधिकतर आतंकवाद, द्विपक्षीय बातचीत या तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से जुड़े रहे हैं।
29 अक्टूबर 2002: भारत में अमेरिकी राजदूत रॉबर्ट ब्लैकविल ने कहा था कि भारत आतंकवाद का शिकार है और कश्मीर में आतंकवाद सीमा पार से जुड़ा है। यह भारत के उस आरोप के अनुरूप था जिसमें पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की बात कही जाती रही है।
सितंबर 2023: अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा कि कश्मीर का समाधान भारत और पाकिस्तान को बातचीत से निकालना चाहिए और इसमें अमेरिका सहित किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होनी चाहिए। भारत लंबे समय से कश्मीर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का विरोध करता रहा है।
फरवरी 2026: अमेरिकी यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के एक आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में भारत का ऐसा नक्शा प्रकाशित हुआ जिसमें जम्मू-कश्मीर को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया। हालांकि पोस्ट बाद में हटा दिया गया, इसलिए इसे अमेरिकी नीति में औपचारिक बदलाव कहना उचित नहीं होगा।
अमेरिकी नीति हमेशा भारत के पक्ष में नहीं रही
अमेरिका का कश्मीर रुख हमेशा भारत के अनुरूप नहीं रहा। नवंबर 1993 में अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी रॉबिन रैफेल की टिप्पणी से भारत में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की संवैधानिक स्थिति पर सवाल उठाए थे।
2002 में अमेरिकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कश्मीर को विवादित मुद्दा बताते हुए भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की जरूरत पर जोर दिया था।
अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टेगस ने कहा था कि कश्मीर पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यानी उस समय वाशिंगटन ने भारत के इस रुख को अपनी आधिकारिक नीति नहीं बनाया था कि कश्मीर पूरी तरह उसका आंतरिक मामला है।
अब बदलाव के संकेत ?
सर्जियो गोर का बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने कश्मीर को केवल भारत-पाकिस्तान विवाद का विषय बताने के बजाय श्रीनगर में उसे “भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा” कहा। हालांकि इसे अभी अमेरिकी नीति में औपचारिक बदलाव कहना जल्दबाजी होगी।
फिर भी 2002 में सीमा पार आतंकवाद पर ब्लैकविल की टिप्पणी, 2023 में गार्सेटी का तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार, 2026 में USTR के नक्शे और अब गोर का बयान—इन घटनाओं को साथ देखें तो अमेरिकी सार्वजनिक कूटनीतिक भाषा में भारत के पक्ष में बढ़ते संकेत जरूर दिखाई देते हैं। यही वजह है कि इस बार पाकिस्तान ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।
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