भारत मंडपम में आयोजित समारोह में शाह ने अशोक सिंघल से जुड़े अपने व्यक्तिगत संस्मरण भी साझा किए। उन्होंने सिंघल की सादगी का उल्लेख करते हुए कहा कि संपन्न परिवार से आने के बावजूद उन्होंने अपना जीवन अत्यंत सामान्य ढंग से जिया। शाह के अनुसार, सिंघल जिस छोटे से कमरे में रहते थे, उसी में उनका रहना, सोना और दैनिक जीवन चलता था। उन्होंने कहा कि सिंघल के जीवन में पद, प्रतिष्ठा या व्यक्तिगत सुविधा से अधिक महत्व संगठन और राष्ट्रकार्य का था।
गृह मंत्री ने कहा कि सिंघल का जीवन संघर्ष और अनुशासन से बना था। उन्होंने स्वयंसेवक के रूप में सिंघल की संगठन के प्रति निष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जिस कार्य को स्वीकार किया, उसके प्रति अंत तक प्रतिबद्ध रहे। शाह ने सिंघल के जीवन से जुड़े कई प्रसंग सुनाते हुए उनके व्यक्तित्व की सादगी और दृढ़ता को रेखांकित किया।
रामजन्मभूमि आंदोलन का प्रमुख चेहरा
अमित शाह ने अपने भाषण में रामजन्मभूमि आंदोलन को अशोक सिंघल के सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय बताया। उन्होंने अयोध्या आंदोलन के दौरान सिंघल के संघर्ष और कारसेवा से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया। शाह ने कहा कि आंदोलन के दौरान चोट लगने और सिर से खून निकलने के बावजूद सिंघल पीछे नहीं हटे और अपने संकल्प पर कायम रहे। शाह ने कहा कि अयोध्या में आज भव्य राम मंदिर का निर्माण जिस लंबे संघर्ष के बाद संभव हुआ, उसमें अशोक सिंघल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने सिंघल को उस आंदोलन के प्रमुख संगठकों में गिनाते हुए कहा कि उन्होंने रामजन्मभूमि के मुद्दे को व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गृह मंत्री ने सिंघल के जीवन को केवल एक आंदोलन या संगठन तक सीमित करके देखने के बजाय उनके व्यापक व्यक्तित्व को याद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जन्मशती समारोह का उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को ऐसे जीवन से परिचित कराना भी है, जिसने समाज और राष्ट्र के लिए व्यक्तिगत जीवन का त्याग किया।
होसबाले ने कहा—सिंघल ने जगाया हिंदू समाज का स्वाभिमान
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अशोक सिंघल के योगदान को रामजन्मभूमि आंदोलन से व्यापक संदर्भ में जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू समाज में आत्मसम्मान और चेतना जगाने का काम किया। उन्होंने सिंघल के व्यक्तित्व को भगवद्गीता में वर्णित “मुक्तसंग, अनहंवादी और धृत्युत्साहसमन्वित” विशेषताओं से जोड़ा। होसबाले ने कहा कि सिंघल का योगदान केवल राम मंदिर आंदोलन तक सीमित नहीं था। उन्होंने वेद और वैदिक परंपरा, संस्कृत, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और हिंदू समाज के संगठन के लिए किए गए उनके प्रयासों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सिंघल के लंबे संघर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव था, लेकिन अब उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का अगला चरण है। होसबाले के अनुसार, राम मंदिर के बाद समाज और राष्ट्र के जीवन में रामराज्य के आदर्शों को स्थापित करने की दिशा में काम करना सिंघल के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
संत समाज ने भी याद किया
समारोह में संत समाज की ओर से स्वामी परमानंद गिरि ने भी अशोक सिंघल के जीवन को याद किया। उन्होंने सिंघल के व्यक्तिगत जीवन में त्याग, अनुशासन और सेवा की भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के बजाय देश और समाज की सेवा का रास्ता चुना। उन्होंने युवाओं से परिश्रम और सामाजिक तथा धार्मिक विषयों के प्रति सजग रहते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारत मंडपम के समारोह में संघ और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों, संत समाज और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही। इस अवसर पर अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों से संबंधित सामग्री का प्रदर्शन तथा श्रीराम से जुड़े स्मृति-प्रतीकों का अनावरण भी किया गया।समारोह में दिए गए वक्तव्यों का केंद्रीय संदेश यही रहा कि अशोक सिंघल की विरासत को केवल रामजन्मभूमि आंदोलन के इतिहास तक सीमित न रखकर उनके त्याग, संगठनात्मक अनुशासन, सांस्कृतिक चेतना और समाजसेवा से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
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