करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। 19 दल बैठक में शामिल हुए, जबकि आम आदमी पार्टी और डीएमके जैसे कुछ प्रमुख सहयोगी दल इससे दूर रहे।
विपक्ष की मुख्य मांगें
बैठक में SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने कई मांगें एक साथ सामने रखीं—
• मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को इससे पूर्व की स्थिति यानी प्री-SIR मतदाता सूची को आधार बनाया जाए। विपक्ष चाहता है कि SIR से पहले की मतदाता सूचियों को भविष्य के चुनावों के लिए आधार बनाया जाए और मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
• SIR की प्रक्रिया पर पुनर्विचार
• मतदाता का नाम हटाने से पहले पर्याप्त सुरक्षा
विपक्ष की मांग है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे सूचना, आपत्ति और अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर मिले।
• EVM की जगह बैलेट पेपर
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के मुताबिक बैठक में शामिल दलों ने भविष्य में चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग पर सहमति जताई।
• CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसदीय कार्रवाई आगे बढ़ाने और उनके पद से हटाने की मांग दोहराई है।
• चुनाव आयोग में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही
विपक्ष चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची में होने वाले बदलावों से संबंधित अधिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।
• 2023 के चुनाव संबंधी कानून की न्यायिक समीक्षा
INDIA ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने और चुनाव आयोग से जुड़े 2023 के कानून के प्रावधानों को चुनौती देने की रणनीति पर भी चर्चा की है।
6 अक्टूबर को EC तक मार्च, अक्टूबर में राष्ट्रपति से मुलाकात
विपक्षी सांसद 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। इसके बाद विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगेंगे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी शिकायतों तथा मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे।
इसके समानांतर 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव 1 नवंबर को दिल्ली की संयुक्त महारैली होगी।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों ने बढ़ाया विवाद
SIR विवाद के बीच इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। विपक्ष इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता। यही वजह है कि SIR और आयोग की कार्यप्रणाली का विवाद अब राजनीतिक आंदोलन के साथ-साथ न्यायिक और संस्थागत प्रक्रिया का भी हिस्सा बन गया है।
बैठक से AAP और DMK दूर, कांग्रेस से रिश्तों में दरार
विपक्षी एकता की तस्वीर के साथ INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद भी साफ दिखाई दिए। AAP बैठक में शामिल नहीं हुई। पार्टी नेता संजय सिंह ने पहले ही कहा था कि AAP अब INDIA ब्लॉक का हिस्सा नहीं है। हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया कि CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की कार्रवाई का वह समर्थन करेगी। इसलिए AAP की गैरमौजूदगी को सीधे कांग्रेस से नाराजगी का परिणाम बताना सही नहीं होगा।DMK ने भी बैठक से दूरी बनाई। इसके पीछे कांग्रेस के साथ तमिलनाडु में राजनीतिक संबंधों में आई खटास प्रमुख कारण है। रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस के विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ जाने के बाद DMK ने कांग्रेस से दूरी बनाई है। इस तरह दिलचस्प स्थिति यह है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली बैठक से AAP और DMK दूर रहे, लेकिन चुनाव आयोग और CEC के मुद्दे पर विपक्षी दलों का मुद्दा-आधारित सहयोग बना हुआ है।
अखिलेश बैठक में नहीं पहुंचे, SP का प्रतिनिधित्व
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी बैठक में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं थे। उनकी पार्टी की ओर से प्रतिनिधि शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में राज्यसभा नामांकन की प्रक्रिया में व्यस्त होने के कारण अखिलेश बैठक में नहीं पहुंचे।
मुद्दा SIR से बढ़कर चुनावी व्यवस्था तक
30 सितंबर की बैठक से स्पष्ट है कि विपक्ष अब इस विवाद को केवल SIR तक सीमित नहीं रखना चाहता। उसकी मांगों का दायरा मतदाता सूची, चुनाव आयोग की जवाबदेही, CEC के खिलाफ कार्रवाई, EVM-बनाम-बैलेट पेपर और चुनावी कानूनों तक फैल गया है।
आने वाले दिनों में इसकी अगली कड़ी होगी—
2 –8 अक्टूबर : देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान
6 अक्टूबर : विपक्षी सांसदों का चुनाव आयोग तक मार्च
अक्टूबर का दूसरा सप्ताह: राष्ट्रपति से मुलाकात का प्रयास
1 नवंबर: दिल्ली में विपक्ष की बड़ी रैली
इस बीच SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद पर सड़क के आंदोलन के साथ सुप्रीम कोर्ट की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।30 सितंबर की बैठक ने INDIA ब्लॉक को SIR और चुनाव आयोग के मुद्दे पर साझा आंदोलन का रोडमैप दिया है। लेकिन AAP और DMK की गैरमौजूदगी यह भी दिखाती है कि चुनाव आयोग के खिलाफ साझा मुद्दा होने के बावजूद विपक्षी गठबंधन के भीतर राजनीतिक संबंध और नेतृत्व का सवाल पूरी तरह सुलझा नहीं है।
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