उत्तर प्रदेश में सपा ने कई मतदान केंद्रों पर फर्जी मतदान, मतदाताओं पर दबाव डालने और बूथ पर कब्जे के आरोप लगाए। दूसरी ओर, कुछ स्थानों पर प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के बाद मतदान जारी रहने की जानकारी दी। बिहार में भी मोकामा के मतदान केंद्र के आसपास पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालांकि, दोनों राज्यों में हुई घटनाओं के सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और उन्हें जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन चुनावों में उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की आठ और महाराष्ट्र की पांच सीटें शामिल थीं। उत्तर प्रदेश में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ। बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
गोरखपुर में सपा प्रत्याशी के साथ कहासुनी, कई जिलों में विवाद
उत्तर प्रदेश में मतदान के दौरान गोरखपुर के डीएवी डिग्री कॉलेज मतदान केंद्र पर भाजपा और सपा समर्थक आमने-सामने आ गए। सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन् त्रिपाठी की मौजूदगी में हुई कहासुनी के बाद केंद्र के आसपास तनाव की स्थिति पैदा हो गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाया। वाराणसी में सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा के सदर तहसील स्थित मतदान केंद्र पहुंचने को लेकर विवाद होने की खबर सामने आई। वहीं, आगरा के फतेहाबाद ब्लॉक स्थित मतदान केंद्र पर सपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक मतदान केंद्र के भीतर पहुंचकर मतदाताओं को प्रभावित कर रहे थे। हंगामे के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया।
सीतापुर के महोली विकासखंड में सपा प्रत्याशी कांति सिंह के पोलिंग एजेंट ने आरोप लगाया कि एक महिला मतदाता का बैलेट पेपर छीनकर उसे मतदान केंद्र से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद सपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और दोनों दलों के समर्थकों के बीच नोकझोंक हुई। प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति संभाली गई। लखीमपुर खीरी के ईसानगर में मतदान केंद्र के नजदीक सपा का पंडाल हटवाए जाने को लेकर भी विवाद सामने आया। सपा पक्ष ने आरोप लगाया कि उसके पंडाल को हटाया गया, जबकि भाजपा का पंडाल अपेक्षाकृत कम दूरी पर होने के बावजूद नहीं हटाया गया। इस मामले में भी दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
फतेहपुर जिले के विजयपुर ब्लॉक में सुबह करीब 10 बजे भाजपा और सपा से जुड़े समर्थकों के बीच कथित तौर पर जबरन मतदान कराने के आरोप को लेकर कहासुनी हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति नियंत्रित कर ली। उनके अनुसार, घटना मामूली झड़प थी और मतदान बाधित नहीं हुआ। इस संबंध में जांच की जा रही है।
अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाए सवाल
मतदान के दौरान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर फर्जी मतदान और बूथ पर कब्जे की कोशिश हुई। सपा ने कहा कि वह विभिन्न मतदान केंद्रों की घटनाओं के वीडियो जुटा रही है और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगी।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने अपनी पार्टी की जीत का दावा किया। दोनों दलों के आरोपों और चुनावी दावों के बीच अब चुनाव आयोग तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
उत्तर प्रदेश में कुल 14.28 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत थे और 152 उम्मीदवार मैदान में थे। मतदान शाम चार बजे समाप्त हुआ। उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की 11 सीटों पर 55.24 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 79.01 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान 51 प्रतिशत रहा।
मोकामा में अनंत सिंह और नीरज कुमार के समर्थकों में झड़प
बिहार में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मुकाबला मतदान के दिन भी चर्चा में बना रहा। मोकामा प्रखंड कार्यालय स्थित मतदान केंद्र के पास जदयू विधायक अनंत सिंह और पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशी नीरज कुमार के समर्थकों के बीच विवाद हुआ। दोनों पक्षों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर मतदान को प्रभावित करने और मतदाताओं को रोकने के आरोप लगाए।
विवाद बढ़ने की सूचना पर बाढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रामकृष्ण पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मतदान केंद्र के आसपास जुटे लोगों को हटाया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया। एक रिपोर्ट में अनंत सिंह के निजी सुरक्षा गार्ड विपिन सिंह, उनके समर्थक राजेश सिंह और नगर भाजपा अध्यक्ष राहुल रंजन को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख किया गया है। इस मामले में हिरासत की अंतिम स्थिति और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका के संबंध में आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। मोकामा के विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। जदयू विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी नीरज कुमार के बजाय जन सुराज समर्थित उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन कर रहे थे। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से राजद के दिलीप सिंह भी मैदान में थे। इस तरह चुनावी मुकाबले के बीच जदयू के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए। नीरज कुमार ने अपनी जीत का दावा किया, जबकि अनंत सिंह ने अनुज सिंह की जीत का भरोसा जताया। दोनों पक्षों के दावों का फैसला मतगणना के बाद ही होगा।
लखीसराय में भी हाथापाई का आरोप
बिहार के लखीसराय में भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक सिंह पर जन सुराज के पोलिंग एजेंट के साथ हाथापाई करने का आरोप लगा। घटना के बाद मतदान केंद्र के आसपास हंगामा होने की खबर सामने आई। इस मामले में भी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष की प्रतीक्षा रहेगी। बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए कुल 150 उम्मीदवार मैदान में थे। राज्य में लगभग 5.32 लाख मतदाता पंजीकृत थे। उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 74.55 प्रतिशत और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में 43.87 प्रतिशत मतदान हुआ। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 87.16 प्रतिशत वोट पड़े।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय के अनुसार, नियंत्रण कक्ष को 13 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका निष्पादन कर दिया गया। निर्वाचन कार्यालय ने मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बताया, जबकि मोकामा में हुई झड़प ने चुनावी माहौल में तनाव की तस्वीर भी सामने रखी।
महाराष्ट्र में भी पांच सीटों पर मतदान
उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा महाराष्ट्र की पांच विधान परिषद सीटों के लिए भी शुक्रवार को मतदान हुआ। इस तरह तीन राज्यों की कुल 24 सीटों पर उम्मीदवारों का चुनावी भविष्य मतपेटियों में बंद हो गया। सभी संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है।
नतीजों पर टिकी नजरें
विधान परिषद चुनावों में सामने आई घटनाओं ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, मतदान केंद्रों की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा-सपा समर्थकों के बीच विवाद और बिहार में मोकामा की घटना ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया, लेकिन इन घटनाओं के आधार पर पूरे मतदान को बाधित या हिंसक घोषित करना उचित नहीं होगा।
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