बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने भी सर्दियों के दौरान प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की घोषित शीतकालीन कार्ययोजना के तहत एक नवंबर से कई अतिरिक्त उपाय लागू किए जाएंगे। इनमें दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से नीचे के उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर रोक, सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम कराने की व्यवस्था, बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) वाले वाहनों को ईंधन नहीं देने और पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।
AQI 245 पहुंचा, GRAP-1 लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार, मंगलवार, 20 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 179 था। बुधवार को इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई और दोपहर दो बजे यह 244 तथा शाम चार बजे 245 दर्ज किया गया। AQI का 201 से 300 के बीच होना खराब वायु गुणवत्ता की श्रेणी में आता है। इसके बाद आयोग ने GRAP के पहले चरण के सभी 25 कार्रवाई बिंदुओं को दिल्ली-NCR में तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया। संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और निर्धारित उपायों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
GRAP-1 का उद्देश्य वायु गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है। इसके तहत निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण, सड़कों की यांत्रिक सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, खुले में कचरा और जैविक अवशेष जलाने पर रोक लगाने तथा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने जैसे उपाय किए जाएंगे। प्रशासन को प्रदूषण संबंधी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करने और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए भी कहा गया है।
एक नवंबर से बाहरी राज्यों की पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध
दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्ययोजना का एक प्रमुख हिस्सा दूसरे राज्यों में पंजीकृत वाहनों के प्रवेश को नियंत्रित करना है। एक नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत और BS-VI से नीचे के उत्सर्जन मानक वाले वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, यह प्रतिबंध सभी पुरानी गाड़ियों पर लागू नहीं होगा। इसका दायरा दिल्ली के बाहर पंजीकृत उन वाहनों तक है, जो निर्धारित BS-VI उत्सर्जन मानक को पूरा नहीं करते। CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। एंबुलेंस, दमकल और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों के लिए भी निर्धारित छूट लागू होगी। इस कदम का उद्देश्य दिल्ली में दूसरे राज्यों से आने वाले अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के उत्सर्जन को कम करना है। विशेष रूप से सर्दियों में बढ़ते यातायात और प्रतिकूल मौसम के कारण प्रदूषकों के हवा में जमा होने की समस्या गंभीर हो जाती है।
सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम
प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित करने की भी घोषणा की है। घोषित व्यवस्था के अनुसार, कार्यालयों में कुल कर्मचारियों में से 50 प्रतिशत को ही बुलाया जाएगा, जबकि शेष कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था के तहत रखा जाएगा। इसका उद्देश्य कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करना, व्यस्त समय में सड़कों पर यातायात का दबाव घटाना और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
इसके साथ ही कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया गया है। नगर निगम दिल्ली (MCD) के कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक चलेंगे, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। अलग-अलग समय पर कार्यालय चलाने से एक ही समय में सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने की कोशिश की जाएगी। यह व्यवस्था एक नवंबर से शीतकालीन प्रदूषण कार्ययोजना के तहत लागू किए जाने वाले उपायों में शामिल है। आवश्यक सेवाओं के लिए निर्धारित छूट और कार्यान्वयन संबंधी निर्देश लागू होंगे।
बिना PUC प्रमाणपत्र के नहीं मिलेगा ईंधन
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए ‘नो PUC, नो फ्यूल’ नीति भी घोषित की है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों और संबंधित ईंधन केंद्रों पर ईंधन देने से रोकने की व्यवस्था की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य वाहनों के प्रदूषण उत्सर्जन की नियमित जांच सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर दबाव बढ़ाना है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने PUC प्रमाणपत्र की वैधता की जांच कराएं और समय पर नवीनीकरण कराएं। इसके अलावा, प्रदूषण फैलाने वाले और निर्धारित नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई तेज की जाएगी।
पार्किंग शुल्क दोगुना, निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने की तैयारी
दिल्ली सरकार की कार्ययोजना के तहत एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क दोगुना करने की व्यवस्था भी घोषित की गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के स्वामित्व और संचालन वाले पार्किंग स्थलों तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए निर्धारित छूट लागू होगी। इस कदम का उद्देश्य निजी वाहनों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करना और लोगों को मेट्रो, बस तथा अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
साझा वाहन यात्रा, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना भी इस योजना का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि कार्यालयों के समय में बदलाव और वर्क फ्रॉम होम के साथ इन उपायों से व्यस्त समय में यातायात तथा वाहन उत्सर्जन का दबाव कम किया जा सकता है।
निर्माण कार्यों और धूल पर भी सख्ती
दिल्ली में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत निर्माण गतिविधियों से उठने वाली धूल है। शीतकालीन कार्ययोजना के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी धूल पैदा करने वाली गतिविधियों पर समयबद्ध प्रतिबंध लगाए जाएंगे। एक नवंबर से 31 जनवरी तक निर्धारित निर्माण गतिविधियों पर रोक और कड़ी निगरानी की व्यवस्था रहेगी। आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निर्धारित अपवाद लागू होंगे। इसके बाद 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर और सख्त प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। इस अवधि में पूर्ण प्रतिबंध का प्रावधान है, हालांकि अत्यावश्यक सरकारी और आपातकालीन कार्यों के लिए निर्धारित छूट लागू हो सकती है।
निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रित करने के लिए एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सिस्टम के इस्तेमाल, निर्माण सामग्री को ढककर रखने तथा सामग्री ले जाने वाले वाहनों की निगरानी पर भी जोर दिया जाएगा। खुले में कचरा जलाने और औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ निरीक्षण तथा कार्रवाई तेज करने की योजना है।
सर्दियों में क्यों बढ़ती है दिल्ली की प्रदूषण समस्या?
सर्दियों के दौरान तापमान में गिरावट, हवा की गति में कमी और प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक वातावरण में अधिक समय तक बने रह सकते हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां समस्या को और बढ़ाती हैं। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती केवल एक दिन के AQI को कम करने तक सीमित नहीं है। इसके लिए सड़क की धूल, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण पर लगातार कार्रवाई के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों के साथ समन्वय भी जरूरी है।
क्या इन उपायों से दिल्ली की हवा साफ होगी ?
GRAP-1 लागू होने से संबंधित एजेंसियों को तत्काल प्रदूषण नियंत्रण के उपाय तेज करने होंगे, जबकि एक नवंबर से प्रस्तावित अतिरिक्त प्रतिबंधों का उद्देश्य सर्दियों में वाहनों और अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। हालांकि, इन कदमों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नियमों को कितनी सख्ती से लागू किया जाता है, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर कितनी प्रभावी निगरानी होती है और मौसम की परिस्थितियां कैसी रहती हैं।
दिल्ली के नागरिकों के लिए फिलहाल जरूरी है कि वे अपने वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वैध रखें, अनावश्यक निजी वाहन यात्रा कम करें, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दें और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों से बचें। राजधानी में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ अब चुनौती तत्काल नियंत्रण और दीर्घकालिक समाधान, दोनों की है। आने वाले दिनों में AQI की स्थिति और सरकारी उपायों के क्रियान्वयन से स्पष्ट होगा कि दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने में इन कदमों का कितना असर पड़ता है।
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