धनतेरस (Dhanteras) और दीपावली भारतीय त्योहार हैं, जो खासकर हिंदू धर्म में बड़ी श्रद्धा और उत्साह से मनाए जाते हैं। इनके पीछे विभिन्न पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं।
धनतेरस:
धनतेरस का त्योहार दीपावली से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। यह दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए समर्पित है, जिन्हें स्वास्थ्य और आरोग्य का देवता माना जाता है। धनतेरस का महत्व इस बात में है कि इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और अन्य वस्त्र खरीदना शुभ माना जाता है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य बना रहे।
धनतेरस (Dhanteras) sके साथ एक कथा यह भी जुड़ी है कि समुद्र मंथन के दौरान, अमृत कलश के साथ भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन का महत्व स्वास्थ्य और संपत्ति के लिए बढ़ जाता है।
” धनतेरस पर दीप जलाए, पूजन हो लक्ष्मी का। धन धान्य से घर भर जाए, सुख हो जीवन का।।”
दीपावली:
भारत में दीपावली और धनतेरस कैसे मनाई जाती है?
भारत में दीपावली और धनतेरस (Dhanteras) बहुत ही उल्लास और आस्था के साथ मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहार हैं। यह त्यौहार धार्मिक आस्था, खुशियों और आपसी भाईचारे का प्रतीक माने जाते हैं। आइए जानते हैं कि ये त्यौहार किस तरह से मनाए जाते हैं और कौन से महीने में मनाए जाते हैं।
दीपावली का महत्व और उसका आयोजन
दीपावली, जिसे “दीपो का पर्व” भी कहा जाता है, एक पंचदिवसीय त्योहार है जो हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। यह अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण चौदह वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था।
इस दिन लोग अपने घरों को साफ-सुथरा करके, दीयों, रंगोली और फूलों से सजाते हैं। शाम को लक्ष्मी पूजा की जाती है, जिसमें धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी का पूजन होता है। इस दिन घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है और बच्चे पटाखे जलाकर खुशियाँ मनाते हैं। मिठाईयां बांटी जाती हैं और लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं।
दीपावली और धनतेरस का समय और महीना
दीपावली और धनतेरस ( Dhanteras) का पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास में आता है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर के अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। इस प्रकार, दीपावली और धनतेरस का पर्व भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इन त्यौहारों में न केवल पूजा-पाठ का महत्व है, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारा और खुशियों का संदेश भी है।
दीपावली का त्योहार मुख्य रूप से भगवान राम के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की थी और 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर नगर को रोशन किया। यह प्रकाश और अंधकार पर विजय का प्रतीक बन गया, जो दीपावली का मुख्य सार है।
इसके अलावा, दीपावली का संबंध लक्ष्मी पूजन से भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, अपने भक्तों के घरों में प्रवेश करती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं। इसलिए, दीपावली के दिन धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है।
“अमावस की रात में दीप जले हर द्वार।
अंधकार का नाश हो दीप जले हर द्वार।।”
घर को मन्दिर जैसा सुन्दर और शांतिमय बनाने के लिए अपनी माता, बहन, बेटी, बहु और पत्नि को सीताजी -लक्ष्मीजी जैसी श्रृद्धा देनी चाहिए। प्रत्येक स्त्री सीता और लक्ष्मी का स्वरुप है उसको बहुत प्रेम, सम्मान और सहयोग देते रहने से घर एक मन्दिर है।
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