भाजपा प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत (Onkar Singh Lakhawat) ने बीकानेर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष उस्मान गनी (Usman Ghani) को भारतीय जनता पार्टी से निकाले जाने से संबंधित एक आदेश जारी किया है, जिसमें बीजेपी की छवि धूमिल करने का प्रयास करने के कारण 6 साल के निष्कासन का जिक्र है.
दिल्ली में दिए इस बयान के कारण निलंबन
उस्मान गनी ने राजस्थान में पहले चरण की वोटिंग के बाद दिल्ली में एक समाचार चैनल से बात करते हुए कहा था कि भाजपा राज्य की 25 सीट में से तीन-चार सीट हार रही है. उन्होंने राज्य में चुनावी रैलियों के दौरान मुसलमानों को लेकर की गई पीएम मोदी की टिप्पणी की भी निंदा की थी. जब पत्रकार ने उनसे मुसलमानों को लेकर मोदी के बयान के बारे में पूछा तो गनी ने कहा कि एक मुस्लिम होने के नाते वह मोदी की बात से निराश हैं. जब वे मुसलमानों के पास भाजपा के लिए वोट मांगने जाते हैं तो समुदाय के लोग प्रधानमंत्री की इस तरह की टिप्पणियों के बारे में बात करते हैं और उनसे जवाब मांगते हैं. गनी ने यह भी कहा कि राज्य में जाट भाजपा से नाराज हैं और उन्होंने चूरू और अन्य सीट पर भाजपा के खिलाफ वोट किया है.
‘पार्टी में अपना पक्ष रखना सबका अधिकार’
उस वक्त मीडिया चैनल से बातचीत करते हुए गनी ने यह भी कहा था कि अगर उनके इस बयान को लेकर पार्टी आपत्ति जताती है, या कोई कार्रवाई करती है तो उन्हें डर नहीं है. उन्होंने कहा कि भाजपा को अगर जीतना है तो सबको साथ लेकर चलना पड़ेगा. उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को मेल लिखने की भी बात कही थी. हालांकि बुधवार शाम उन्हें बीजेपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. अपने निलंबन पर उस्मान गनी ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा. पार्टी में रहकर अपना पक्ष रखना सभी का अधिकार होता है. ये अधिकार प्रधानमंत्री से लेकर एक कार्यकर्ता तक सभी के पास है. राजस्थान में प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आई तो वह लोगों की संपत्ति को मुसलमानों में बांट देगी. ये बयान मेरी कौम को लेकर था जिससे मैं सहमत नहीं था. क्योंकि धरातल पर हमें काम करना पड़ता है और लोगों में जवाब भी देना पड़ता है. इसीलिए मैंने उनके बयान को गलत कहा.
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