Jammu-Kashmir को पूर्ण राज्य का दर्जा देगा केंद्र, शीतकालीन सत्र में आएगा प्रस्ताव

जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री बनने के बाद से उमर अब्दुल्ला लगातार प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की कोशिश कर रहे थे । शनिवार को केंद्र से इसे लेकर सहमति मिल गई । अगले महीने संसद में शीतकालीन सत्र शुरू होने पर पूर्ण राज्य को लेकर प्रस्ताव लाया जाएगा। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश ही रहेगा।

उमर अब्दुल्ला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते हुए
Written By : सुनील कुमार साहू | Updated on: October 30, 2024 6:21 pm

Jammu-Kashmir

जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए शनिवार का दिन एक और खुशी लेकर आया। मुख्यमंत्री बनने के बाद Omar Abdullah  लगातार प्रदेश को पूर्ण राज्य दिलाने की कोशिश  कर रहे थे, और शनिवार को उनकी यह कोशिश सफल हुई। केंद्र सरकार ने  जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने पर सहमति दे दी है। अगले महीने संसद के शीतकालीन सत्र में इसे लेकर प्रस्ताव लाया जाएगा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानूनी रूप से बहाल होगा। लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना रहेगा।

Jammu-Kashmir के संसद को गुजरना होगा इन प्रक्रियाओं से 

  •  सबसे पहले केंद्र सरकार को संविधान की धारा 3 और 4 में बदलाव करने होंगे।
  •  उसके बाद सदन की दोनों लोकसभा और राज्यसभा से इसे पास कराना होगा।
  •   पूर्ण राज्य के बिल को  राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा हस्ताक्षर के लिए।
  •   सबसे आखिर में , हस्ताक्षर के बाद कानूनी रूप से  जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाएगा।

पूर्ण राज्य बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में  सरकार के पास क्या अधिकार होंगे

  •  पूर्ण राज्य बहाल होने के बाद  जम्मू कश्मीर की पुलिस और कानून व्यवस्था  राज्य सरकार के हाथों में फिर से वापस आ जाएगी।
  •  राज्य को अब  वित्तीय मदद के लिए केंद्र पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वित्त आयोग से सहायता मिल जाएगी
  •  राज्य सरकार पर विधायकों की संख्या के  10% मंत्री   रखने वाली अड़चन भी खत्म हो जाएगी। पूर्ण राज्य के बाद वह विधायकों की संख्या 15% तक के मंत्री बना सकते हैं।
  •  पूर्ण राज्य के बाद राज्य सरकार अपने सारे चुनावी वादे पूरा कर सकती है। लेफ्टिनेंट गवर्नर इसमें कोई अड़चन पैदा नहीं कर पाएंगे

जम्मू- कश्मीर विधानसभा चुनाव का क्या नतीजा रहा

दस साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में जम्मू कश्मीर के लोगों ने बड़े उत्साह से वोट दिया। प्रदेश की 90 सीटों में से नेशनल कांफ्रेंस ने 42 सीटें अर्जित की, कांग्रेस ने 6 सीट, भाजपा ने 29 सीटें और पीडीपी ने तीन सीटें। सरकार नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर बनाई।

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