इस फैसले का असर ऐसे समय में सामने आया है जब आम आदमी पहले से ही ईंधन और घरेलू खर्चों में लगातार बढ़ोतरी का सामना कर रहा है। गर्मी के कारण बिजली की खपत अपने चरम पर है और ऐसे में बढ़ा हुआ सरचार्ज सीधे घरेलू बजट पर असर डालेगा।
10 प्रतिशत की सीमा टूटी, 17 प्रतिशत तक पहुंचा सरचार्ज
अब तक बिजली कंपनियों के लिए एफपीपीएएस की अधिकतम सीमा 10 प्रतिशत मानी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था में दिल्ली की तीनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों को इससे कहीं अधिक सरचार्ज वसूलने की अनुमति दी गई है। मीडिया रिपोर्टों और आयोग के आदेशों के अनुसार:
यानी जिन उपभोक्ताओं को दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ नहीं मिलता, उनके मासिक बिजली बिल में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है।
सब्सिडी वालों को राहत, बाकी पर सीधा असर
रिपोर्टों के अनुसार, बढ़े हुए सरचार्ज का सबसे अधिक असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे से बाहर हैं। पूर्ण या 50 प्रतिशत सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत राहत मिल सकती है, लेकिन मध्यम वर्ग और अधिक खपत वाले परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी सीधे जेब पर भार डालेगी।
आखिर क्यों बढ़ रहा है बिजली बिल?
बिजली कंपनियों का तर्क है कि कोयला, गैस और अन्य स्रोतों से बिजली खरीदने की लागत में लगातार वृद्धि हुई है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और ईंधन की महंगी कीमतों के कारण डिस्कॉम का खर्च बढ़ा है। इसी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए एफपीपीएएस लगाया जाता है। DERC ने हाल ही में स्वचालित ईंधन लागत समायोजन की नई व्यवस्था भी लागू की है, जिससे बिजली खरीद लागत में बदलाव का असर अपेक्षाकृत तेजी से उपभोक्ताओं के बिलों में दिखाई दे सकता है।
पहले भी बढ़ चुके हैं बिजली बिल
यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली के उपभोक्ताओं पर बिजली खरीद लागत का अतिरिक्त बोझ डाला गया हो। पिछले वर्षों में भी डीईआरसी ने पीपीएसी (PPAC) के रूप में 7 से 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति दी थी। उपभोक्ता संगठनों ने उस समय भी इसका विरोध किया था और इसे आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ बताया था।
महंगाई से जूझते परिवारों की बढ़ेगी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब बिजली बिल में संभावित 17 प्रतिशत तक का इजाफा घरेलू बजट को और असंतुलित कर सकता है। गर्मी के मौसम में एसी, कूलर और पंखों का उपयोग बढ़ने से बिजली खपत पहले ही अधिक रहती है। ऐसे में बढ़ा हुआ सरचार्ज उपभोक्ताओं के मासिक खर्च में नई चिंता जोड़ सकता है।कुल मिलाकर, दिल्ली के उपभोक्ताओं के लिए संदेश साफ है—महंगाई की मार अब केवल पेट्रोल पंप और रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिजली के बिलों में भी उसका असर दिखाई देने वाला है।
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