देश में कैंसर और डायबिटीज (Cancer and Diabetes) दो बीमारियां जिस तेजी से पैर पसार रही हैं, बुजुर्गों के इलाज का खर्च उठाना निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। वास्तविक स्थिति बहुत ही गंभीर है। रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। डायबिटीज को कैंसर के साथ जोड़ने को लेकर आप थोड़े हैरान जरूर होंगे लेकिन यह हैरानी की बात इसलिए नहीं है क्योंकि डायबिटीज को साइलेंट किलर भी कहा जाता है। वैसे कहने को तो यह बिल्कुल साधारण सा रोग है, खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है लेकिन ये कैंसर से कम खतरनाक जरा भी नहीं है। भारत में डायबिटीज पीड़ितों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है यह बेहद चिंताजनक है।
शरीर में एक तरह का हार्मोन इंसुलीन का बनना कम हो जाने की वजह से लोग डायबिटीज जैसी बीमारी का शिकार होते हैं। देश में डायबीटिक मरीजों की संख्या करीब 8 करोड़ है। आप भी जानते हैं कि देश की 65 फीसद से ज्यादा आबादी गांव में रहती है जहां आज भी डायबिटीज की जांच आमतौर पर तब तक नहीं कराई जाती है जब तक की कोई गंभीर बीमारी जकड़ न ले। इसलिए उनके आंकड़े को भी अगर इसमें शामिल कर दिया जाए तो आंकड़े डरावने हो जाएंगे।
42 करोड़़ से अधिक मरीज
विश्व स्वास्थ्य संगठन की हम बात करें यानी हो कि तो दुनिया भर में लगभग 42 करोड़ से भी ज्यादा लोग डायबिटीज से ग्रस्त हैं लेकिन भारत में मरीजों की संख्या सर्वाधिक है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष से 2011 में भारत में डायबिटीज ग्रस्त मरीजों की संख्या लगभग 6.5 करोड़ थी जो पिछले 10 वर्षों में 18 फीसदी की दर से बढ़ी है।
राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में सबसे अधिक डायबिटीज के मरीज हैं। यानी उत्तर भारत और दक्षिण भारत दोनों समान रूप से प्रभावित है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि अभी तक दुनिया में डायबिटीज के मरीजों को पूर्णता ठीक करने के लिए कोई मान्य पद्धति विकसित नहीं मन हुई है।
मरीजों की के ठीक करने के लिए तो अलग-अलग डॉक्टर अलग-अलग तरह की सलाह देते हैं। अभी तक इस रोग का कोई टीका नहीं विकसित हो पाया इस विश्व स्वास्थ्य संगठन की नाकामी कहें या दुनिया के वैज्ञानिकों के लिए चुनौती अभी कोई सटीक और कारगर इलाज विकसित नहीं हुआ।
अंग्रेजी दवाओं का असर कुछ समय के लिए
एलोपैथिक चिकित्सक यानी एमबीबीएस और इसके आगे की पढ़ाई किए डॉक्टर आम तौर पर इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ाने वाली दवा मेटफार्मिन (Metformin), ग्लिपिजाइड (Glipizide), सिटैगलिप्टिन (Sitagliptin) इम्पैग्लिफ्लोजीन (Empagliflozin) लिराग्लूटाइड (Liraglutide) और अंत में इंसुलीन (insulin) का इंजेक्शन देकर इसे नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। इनमें से कोई दवा ऐसी नहीं है जिसे कुछ दिनों तक या कुछ महीनों तक खाकर इस बीमारी से निजात मिल सके। Top of Form
आयुर्वेदिक दवाएं ज्यादा कारगर लेकिन…
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी पर नियंत्रण जीवनशैली और खानपान में सुधार कर के ही किया जा सकता है। यही वजह है कि 2500 रुपये फीस लेने वाले और 14 हजार रुपये फीस लेने वाले दिल्ली के एक मशहूर मधुमेह रोग विशेषज्ञ अंग्रेजी दवा के साथ मेथी के लड्डू खाने का नुख्शा भी लिखकर देते हैं।
आम तौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सक गुड़मार (Gurmar), विजयसार (Vijaysar), जामुन, करेला (Bitter Melon), मेथी आदि चीजों का सेवन करने की सलाह देते हैं। वही होमियोपैथिक चिकित्सक फास्फोरस (Phosphorus), सल्फर और इंसुलीन देकर इसे नियंत्रित करते हैं।
कैसे रखे नियंत्रण में
कहा जाता है कि या तो आप डायबिटीज को नियंत्रण में रखें नहीं तो वह आपको नियंत्रण में रख लेगी। इसे नियंत्रण में रखने के लिए सुबह 40 मिनट तक टहलें। मीठी चीजों का सेवन कम से कम करें। समय पर सोएं और जगें। खान पान में तली भूनी हुई चीजों से परहेज करें। तनाव से बचें।हरी सब्जियां और सलाद का सेवन अधिक करें।