प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट:12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट पर रहेगी सबकी नजर

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की वैधता पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है. CJI की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ 12 दिसंबर को सुनवाई करेगी.

Written By : संतोष कुमार | Updated on: December 7, 2024 10:40 pm

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच इस मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.

CJI की अध्यक्षता वाली स्पेशल पीठ करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना. जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की स्पेशल बेंच इस मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ताओं की दलील है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट मनमाना और अनुचित है. यह धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिससे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत मौलिक अधिकारों का हनन होता है.

किसने औऱ कब दायर हुई थी याचिका
इस वर्शिप एक्ट 1991 के खिलाफ 2020 में बीजेपी नेता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस मामले में मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था.

कई अन्य याचिका भी दायर की गई हैं
इस एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई अन्य याचिकाएं भी लगी हैं. विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ औऱ डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी इस कानून को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

ज्ञानवापी विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा
इस एक्ट कानून की चर्चा सबसे ज्यादा वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में हुई है. इस मामले में हाल ही में ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंध समिति ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल की है. मस्जिद कमेटी का कहना है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करने की मांग के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.

क्या प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट ?
1991 में लागू इस एक्ट के मुताबिक 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता. यदि कोई इस एक्ट का उल्लंघन करने का प्रयास करता है तो उसे जुर्माना और तीन साल तक की जेल भी हो सकती है. यह कानून तत्कालीन कांग्रेस प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव सरकार 1991 में लेकर आई थी.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट धारा- 2
एक्ट की धारा 2 के मुताबिक 15 अगस्त 1947 में मौजूद किसी धार्मिक स्थल में बदलाव के विषय में यदि कोई याचिका कोर्ट में पेंडिंग है तो उसे बंद कर दिया जाएगा.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा- 3
एक्ट की धारा 3 के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से किसी दूसरे धर्म में बदलने की अनुमति नहीं है. इसके साथ ही यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि एक धर्म के पूजा स्थल को दूसरे धर्म के रूप में ना बदला जाए या फिर एक ही धर्म के अलग खंड में भी ना बदला जाए.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा 4 (1)
इस कानून की धारा 4(1) कहती है कि 15 अगस्त 1947 को एक पूजा स्थल का चरित्र जैसा था उसे वैसा ही बरकरार रखा जाएगा.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा 4 (2)
धारा- 4 (2) के अनुसार यह उन मुकदमों और कानूनी कार्यवाहियों को रोकने की बात करता है जो प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट के लागू होने की तारीख पर पेंडिंग थे.

प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट की धारा 5
में प्रावधान है कि यह एक्ट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले और इससे संबंधित किसी भी मुकदमे या अपील या कार्यवाही पर लागू नहीं करेगा.

ये भी पढ़ें:हेमंत सरकार का नया सियासी फॉर्मूला: आधे मंत्री रिप्लेस, फारवर्ड गायब!

One thought on “प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट:12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट पर रहेगी सबकी नजर

  1. Backbiome is an advanced daily wellness supplement formulated to help support spinal comfort, reduce feelings of built-up tension, and promote freer, smoother movement throughout backbiome everyday life.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *