पेरिस की चमचमाती गलियों में वह एक ऐतिहासिक क्षण था। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित डॉक्यूमेंट्री फिल्म महोत्सवों में से एक ‘सिनेमा डू रील’ अपनी भव्य शाम के अंतिम पड़ाव पर था। तभी मंच पर रोशनी चमकी और उद्घोषक ने घोषणा की “मेंशन स्पेशेल- प्रिक्स डू पैट्रिमोइन कल्चरल इमैटेरियल 2025 (विशेष उल्लेख– अमूर्त सांस्कृतिक विरासत पुरस्कार 2025) प्रदान किया जाता है ‘स्ट्रीम-स्टोरी’ को!”
पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की आंखों में गर्व की चमक थी। यह फिल्म सिर्फ एक डॉक्यूमेंट्री नहीं है, बल्कि एक जीवंत विरासत का दस्तावेज़ है। स्ट्रीम-स्टोरी कहानी है हिमाचल प्रदेश की प्राचीन ‘कुल्ह’ जल प्रणालियों की।
फ्रांसीसी संस्कृति मंत्रालय के ‘डायरेक्शन जनरल डेस पैट्रिमोइनेस एट डे ल’आर्किटेक्चर’ द्वारा प्रायोजित यह पुरस्कार उन सिनेमाई कार्यों को मान्यता देता है, जो मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत- मौखिक परंपराओं, अनुष्ठानों, प्रदर्शन कलाओं और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण की दिशा में कार्य करते हैं और उसका जश्न मनाते हैं।
जलधाराओं की कहानी : एक बेजोड़ विरासत
अपने मूल में, स्ट्रीम-स्टोरी सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं है। यह हिमाचल प्रदेश की सदियों पुरानी जल प्रणाली ‘कुल्ह’ को एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि है। पीढ़ियों से चली आ रही सामुदायिक बुद्धिमता की प्रतीक ये जटिल सिंचाई प्रणालियां न सिर्फ़ इंजीनियरिंग का चमत्कार हैं, बल्कि स्टोरीटेलिंग, लोककथा और पारिस्थितिकी दर्शन की वाहक भी हैं। ये जलधाराएं सिर्फ नहरें नहीं हैं, ये हमारी ज्ञान परम्परा की धड़कन हैं। एक अद्भुत ऑडियो-विजुअल अनुभव के माध्यम से ‘स्ट्रीम-स्टोरी’ पानी को एक कथात्मक शक्ति में बदल देती है, जो समय और स्मृति के माध्यम से बहती है तथा लोगों, प्रकृति और परम्परा के बीच गहरे सम्बंध को उजागर करती है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत और आईजीएनसीए के लिए मील का पत्थर
आईजीएनसीए के प्रतिनिधि प्रो. अचल पण्ड्या (विभागाध्यक्ष, संरक्षण प्रभाग, आईजीएनसीए) ने पुरस्कार ग्रहण करते हुए कहा, “यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता आईजीएनसीए के लिए एक गौरवपूर्ण उपलब्धि है, जो भारत की विशद् कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए समर्पित है। ‘स्ट्रीम-स्टोरी’ न केवल भारत की विरासत के एक कम-ज्ञात, लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से को उभारती है, बल्कि एक जीवंत संग्रह के रूप में सिनेमा की ताकत को भी बयां करती है। यह डॉक्यूमेंट्री न केवल परम्परा का दस्तावेजीकरण करती है, बल्कि उसे तल्लीनता से व्याख्यायित और उद्घाटित करती है।”
एक विलुप्त होती विरासत को संजोने की कोशिश
फिल्म के साथ, आईजीएनसीए द्वारा गहन शोध के बाद प्रकाशित की गई एक पुस्तक भी ‘स्ट्रीम-स्टोरी’ के विषय में विस्तार से बताती है, जिसमें इतिहास, मिथक, फील्ड स्टडी और दृश्य कथावाचन को एक साथ बुना गया है। फिल्म और पुस्तक, दोनों मिलकर संस्कृति का एक अद्वितीय युग्म बनाते हैं। यह एक ऐसा कलात्मक प्रयास है, जो भारत की अमूर्त विरासत को वैश्विक मंच पर लाता है।
सिनेमा डू रील में मिला यह पुरस्कार भारतीय सांस्कृतिक सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो जीवंत परंपराओं विलुप्त हो जाने से पहले, उन्हें संरक्षित करने के महत्व पर प्रकाश डालता है। ‘स्ट्रीम-स्टोरी’ विरासत की गतिशीलता, मौखिक परम्पराओं की सुंदरता और हमारे नैसर्गिक जगत में निहित शाश्वत ज्ञान का एक प्रमाण है।
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