यह सिर्फ मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा नहीं है। नेपाल के सामने अब एक और संभावित जलप्रलय का खतरा खड़ा है। 26 अगस्त को जिस ग्लेशियर धंसने और उसके बाद आए फ्लैश फ्लड ने गांवों, सड़कों, पुलों और बस्तियों को बहा दिया, उसी इलाके में पानी के बहाव से बनी नई झीलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
एक झील ने रोक दिया रेस्क्यू ऑपरेशन
शुक्रवार को नेपाल-चीन सीमा के पास बनी एक नई झील के पानी का स्तर बढ़ने और उसके overflow की आशंका के बाद कुछ समय के लिए बचाव अभियान रोकना पड़ा। चीन की तरफ भी बचावकर्मियों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। बाद में अधिकारियों ने जोखिम को फिलहाल नियंत्रण में बताया और अभियान दोबारा शुरू किया।
Reuters के अनुसार नेपाल अब सीमा क्षेत्र में बनी दो upstream barrier lakes पर लगातार निगरानी रख रहा है। इनमें से एक के आकार में वृद्धि देखी गई है। यही वजह है कि बचावकर्मियों के लिए मलबे में फंसे लोगों को निकालने से ज्यादा बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि राहत अभियान के बीच अचानक दूसरी बाढ़ न आ जाए।
अगले 72 घंटे इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि यदि किसी प्राकृतिक बांध के टूटने से पानी अचानक नीचे की ओर आया तो Rasuwa और Bhote Koshi क्षेत्र के साथ-साथ नदी घाटी के निचले इलाकों में फिर भारी तबाही हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों ने यह नहीं कहा है कि बुधवार जैसी दूसरी महाविनाशकारी बाढ़ निश्चित रूप से आएगी। फिलहाल खतरे की गंभीरता को देखते हुए एहतियाती निगरानी बढ़ा दी गई है।
3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया गया
नेपाल में राहत और बचाव अभियान बड़े पैमाने पर चल रहा है। Associated Press (AP) के मुताबिक अब तक 3,700 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है और करीब 14,829 सुरक्षा कर्मी खोज एवं बचाव अभियान में लगाए गए हैं। लेकिन हजारों लोगों के अब भी लापता होने के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण है। कई इलाकों में सड़कें और पुल टूट चुके हैं और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के अनुसार इस आपदा से 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अस्पतालों, स्कूलों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। हिमालय के इस दुर्गम इलाके में राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारत की चिंता: 320 नागरिक अब भी संपर्क से बाहर
नेपाल की त्रासदी का असर भारत पर भी गहरा पड़ा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक करीब 320 भारतीय नागरिक अब भी संपर्क से बाहर हैं। यह संख्या पिछले दो दिनों में लगातार बदलती रही है क्योंकि कुछ लोगों से संपर्क स्थापित हुआ है और कई भारतीयों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है।
शुक्रवार को राहत की एक बड़ी खबर दिल्ली पहुंची। नेपाल में बाढ़ से बचाए गए तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री काठमांडू से दिल्ली पहुंचे। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एयरपोर्ट पर उनसे मुलाकात की और उनके अनुभव सुने।
जयशंकर के मुताबिक अब तक करीब 85 भारतीयों को बचाया जा चुका है, लेकिन 315 से अधिक भारतीय अभी भी संपर्क से बाहर हैं। सरकार की प्राथमिकता नेपाल में फंसे भारतीयों से संपर्क स्थापित करना और उन्हें सुरक्षित निकालना है।
चीन की तरफ तिब्बत में फंसे भारतीयों को भी निकालने का अभियान जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार चीन की तरफ फंसे भारतीयों के कई समूह सुरक्षित होकर नेपाल पहुंच चुके हैं।
चीन में भी तबाही का बड़ा निशान
यह आपदा सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रही। चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक 5 लोगों की मौत और 558 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी बताई गई है।
चीन ने अपनी तरफ बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। लेकिन यहां भी पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति और नई बनी झीलों का खतरा अभियान को मुश्किल बना रहा है। शुक्रवार को झील से जुड़े खतरे का आकलन करने के बाद चीन ने बचाव अभियान फिर शुरू किया।
नेपाल ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को फिलहाल रोका
भारत समेत कई देशों ने नेपाल को राहत और बचाव सहायता देने की पेशकश की है। लेकिन नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी search-and-rescue टीमों को बुलाने से इनकार किया है। नेपाल का कहना है कि उसके अपने सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं।
भारत ने हालांकि सहायता का हाथ पीछे नहीं खींचा है। जयशंकर के मुताबिक भारत नेपाल के लिए Bailey bridges, चिकित्सा दल और tunnel-rescue विशेषज्ञ भेज रहा है। भारत का फोकस एक तरफ नेपाल की राहत व्यवस्था को मजबूत करने पर है तो दूसरी तरफ अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने पर।
ग्लेशियर से शुरू हुई तबाही ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम ने हिमालय में तेजी से बदलते पर्यावरण और ग्लेशियरों की अस्थिरता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Reuters के मुताबिक विशेषज्ञों ने उपग्रह तस्वीरों के आधार पर आशंका जताई है कि इस आपदा की शुरुआत सीमा के पास ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटकर नीचे गिरने से हुई। इसके बाद पानी और मलबे का ऐसा सैलाब आया जिसने कुछ ही मिनटों में नदी का जलस्तर कई मीटर बढ़ा दिया। अब असली डर यह है कि पहली आपदा के बाद पहाड़ों में जमा पानी और मलबा कहीं दूसरी आपदा की वजह न बन जाए।
नेपाल में इस वक्त तस्वीर बेहद भयावह है—579 मौतें, 1,924 लापता; सीमा पार तिब्बत में 5 मौतें और 558 लापता। कुल 584 मौतें और 2,482 लोग बेखबर। दूसरी तरफ 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है और ऊपर पहाड़ों में नई झीलों पर निगाहें टिकी हैं। बचाव अभियान जारी है, लेकिन नेपाल के लिए अगला मोर्चा अब मलबे में नहीं, पहाड़ों में जमा उस पानी में है जो कभी भी नीचे उतर सकता है।
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