राम मंदिर पर ध्वजारोहण से पहले पूरी अयोध्या को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में तब्दील कर दिया गया था और ड्रोन निगरानी सहित व्यापक इंतज़ाम किए गए थे। समारोह के लिए हज़ारों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। धर्म-ध्वज पर बने चिन्हों—सूर्य, ॐ और कोविदार वृक्ष—ने भी सबका ध्यान खींचा। सूर्य ऊर्जा और प्रकाश का, ॐ सृष्टि और चेतना का तथा कोविदार वृक्ष रामायण परंपरा में पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ध्वजा के डिजाइन में इन प्रतीकों का शामिल करना इसे विशिष्ट आध्यात्मिक रूप देता है। इन चिन्हों को “सांस्कृतिक चेतना के स्थायी प्रतीक” के रूप में देखा जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वजारोहण से पहले मंदिर में आरती की और फिर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए लगभग 22 फीट लंबे धर्म-ध्वज को मंदिर के ऊंचे शिखर पर चढ़ाया। ध्वज को विशेषज्ञों की सहायता से तैयार किया गया ताकि यह तेज़ हवा में भी स्थिर रह सके। कार्यक्रम में सामाजिक समावेशन पर विशेष ध्यान दिया गया था और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि आमंत्रित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि धर्म-ध्वज सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि “भारतीय सभ्यता के पुनरुत्थान” तथा “सत्य, कर्तव्य और न्याय” जैसे मूल्यों का प्रतीक है।
मोदी ने इस क्षण को “सदियों के घाव भरने की प्रक्रिया” और “लंबी सभ्यतागत प्रतिज्ञा की पूर्ति” बताया। आयोजन में राम मंदिर निर्माण के बाद पहली बार ध्वज फहराने की परंपरा स्थापित की गई, जिसे भविष्य में वार्षिक रूप से निभाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
खबरों के अनुसार, ध्वजारोहण को लेकर अयोध्या में विशेष ट्रैफिक नियंत्रण प्रणाली, पार्किंग व्यवस्था और विशिष्ट अतिथियों के लिए अलग प्रबंधन भी किया गया था। इससे आयोजन की व्यापकता और प्रशासनिक तैयारी का भी स्पष्ट संकेत मिलता है। धर्म-ध्वज फहराने का यह क्षण अयोध्या के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है, जिसे धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय गौरव से जोड़कर प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
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