एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए पहुंचे भारतीय दल भी इस अव्यवस्था से अछूता नहीं रहा। भारत के शेफ डी मिशन सहदेव यादव के अनुसार करीब 30 से 35 भारतीय खिलाड़ियों के नाम आवास सूची से हटा दिए गए थे, जिसके बाद भारतीय दल को अतिरिक्त होटल कमरे बुक कराने पड़े। हालांकि अब सभी भारतीय खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था कर ली गई है।
यह 20वां एशियाई खेल है और 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले इस महाकुंभ में एशिया के 45 देश और क्षेत्र हिस्सा ले रहे हैं। करीब 11 हजार से अधिक खिलाड़ी 43 खेलों में 469 पदक स्पर्धाओं में उतरेंगे। खिलाड़ियों, अधिकारियों और अन्य प्रतिभागियों को मिलाकर संख्या करीब 17 हजार पहुंच गई है। पिछले हांगझोउ खेलों में 40 खेल थे, जबकि नागोया में खेलों की संख्या बढ़ाकर 43 कर दी गई है। मिश्रित मार्शल आर्ट्स, पैडल, सर्फिंग, वर्चुअल ताइक्वांडो और टेकबॉल जैसे खेल इस बार कार्यक्रम में शामिल किए गए हैं।
भारत के लिए 107 पदकों के रिकॉर्ड को दोहराने की चुनौती
इन खेलों में सबसे ज्यादा नजर भारतीय दल पर भी रहेगी। भारत ने हांगझोउ में 107 पदक—28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य जीतकर इतिहास बनाया था और पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा था। यह पहली बार था जब भारत ने एशियाई खेलों में 100 पदकों का आंकड़ा पार किया। इस बार भारतीय खेल जगत के सामने उसी प्रदर्शन को बरकरार रखने और उससे आगे निकलने की चुनौती है। हालांकि पदकों की कोई निश्चित संख्या पहले से तय नहीं की जा सकती।
भारत के पिछले दो एशियाई खेलों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर भी इस बार की उम्मीदों का आधार है। 2018 के जकार्ता-पालेमबांग खेलों में भारत ने 70 पदक जीते थे—16 स्वर्ण, 23 रजत और 31 कांस्य। हांगझोउ में यह आंकड़ा बढ़कर 107 हो गया। यानी दो संस्करणों के बीच भारत की कुल पदक संख्या में 37 पदकों की वृद्धि हुई।
हांगझोउ में भारत के लिए एथलेटिक्स सबसे सफल खेल रहा था, जहां 29 पदक मिले। शूटिंग से 22 और तीरंदाजी से नौ पदक आए। क्रिकेट और कबड्डी में पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीते थे। इस बार भी एथलेटिक्स, शूटिंग, तीरंदाजी, कुश्ती, मुक्केबाजी, बैडमिंटन, हॉकी, कबड्डी और क्रिकेट भारत के प्रमुख पदक क्षेत्रों में रहेंगे।
हालांकि भारतीय चुनौती में कुछ बदलाव भी हैं। स्टार भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा इस बार चोट के कारण हिस्सा नहीं ले रहे हैं, जबकि कई दूसरे पदक विजेता अपने खिताब या पिछले प्रदर्शन को दोहराने उतरेंगे। शॉटपुट में तजिंदरपाल सिंह तूर लगातार तीसरा एशियाई खेल स्वर्ण जीतने की कोशिश करेंगे। बैडमिंटन में पीवी सिंधु, शूटिंग में मनु भाकर, कुश्ती में अमन सहरावत और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन जैसे नाम भारतीय चुनौती के प्रमुख चेहरे हैं।
503 खिलाड़ियों का भारतीय दल
भारत ने इस बार 503 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जिसमें 269 पुरुष और 234 महिला खिलाड़ी हैं। यह संख्या अगस्त में स्वीकृत 492 खिलाड़ियों के दल से बाद में बढ़ी है। भारतीय खिलाड़ी 36 खेलों में चुनौती पेश करेंगे। एथलेटिक्स भारतीय दल का सबसे बड़ा खेल समूह है।
उद्घाटन समारोह में भारत के लिए तिरंगा मनु भाकर और तजिंदरपाल सिंह तूर थामेंगे। मनु भाकर दो बार की ओलंपिक पदक विजेता हैं, जबकि तजिंदरपाल सिंह तूर एशियाई खेलों में दो बार के मौजूदा चैंपियन हैं।
एथलीट विलेज क्यों नहीं बनाया गया?
नागोया एशियाई खेलों में पारंपरिक एथलीट विलेज नहीं बनाया जाना इस बार की सबसे अलग व्यवस्था है। आयोजकों और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया का तर्क है कि इतने बड़े आयोजन के लिए स्थायी एथलीट विलेज बनाने पर भारी खर्च होता और खेलों के बाद उसके इस्तेमाल को लेकर समस्या पैदा हो सकती थी। इसके बजाय होटल, अस्थायी आवास और क्रूज जहाज का इस्तेमाल किया गया है। कोस्टा सेरेना में करीब 5,000 लोगों को ठहराने की क्षमता बताई गई है।
लेकिन व्यवहार में इस व्यवस्था को लेकर मुश्किलें सामने आईं। भारतीय शेफ डी मिशन सहदेव यादव ने बताया कि करीब 30–35 भारतीय खिलाड़ियों के नाम आवास सूची से हटाए गए थे। इसके बाद भारत ने 18 होटल कमरे बुक किए और करीब 10 और कमरे बुक करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रभावित खिलाड़ियों में बैडमिंटन और शूटिंग के खिलाड़ी भी शामिल थे। यादव के अनुसार अब भारतीय दल के सभी खिलाड़ियों को आवास मिल चुका है।
आवास के साथ-साथ मान्यता कार्ड और परिवहन को लेकर भी देरी की शिकायतें सामने आई हैं। खासकर क्रूज पर ठहराए गए खिलाड़ियों के लिए मान्यता प्रक्रिया में अधिक समय लगने की बात भारतीय दल के अधिकारियों ने कही है। भारतीय टीम ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त वाहन और होटल की व्यवस्था की।
बारिश के बाद अब टाइफून की चुनौती
आयोजन की मुश्किलें केवल आवास तक सीमित नहीं हैं। नागोया में पिछले दिनों हुई भारी बारिश ने परिवहन और कुछ प्रतियोगिताओं को प्रभावित किया था। कुछ खिलाड़ियों और अधिकारियों को अस्थायी रूप से अपने ठिकानों से हटाना पड़ा था। अब ट्रॉपिकल स्टॉर्म डुजुआन को लेकर आयोजक सतर्क हैं।
मौसम संबंधी पूर्वानुमानों के मुताबिक तूफान के 21 सितंबर के आसपास आइची-नागोया क्षेत्र को प्रभावित करने की आशंका है। रिपोर्टों के अनुसार इसकी अधिकतम स्थायी हवाओं की रफ्तार करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटा और झोंकों की रफ्तार 126 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई थी। आयोजकों ने खराब मौसम की स्थिति में खिलाड़ियों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की है।
नागोया के मेयर और एशियाई खेलों के उपाध्यक्ष इचिरो हिरोसावा के मुताबिक सामान्य बारिश में प्रतियोगिताएं जारी रहेंगी, लेकिन अगर मूसलाधार बारिश के कारण आपात चेतावनी जारी होती है तो खिलाड़ियों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जाएगा। तेज हवाओं की स्थिति में कोस्टा सेरेना क्रूज जहाज को भी बंदरगाह से हटाकर सुरक्षित समुद्री क्षेत्र में ले जाने की योजना तैयार है।
खेल शुरू होने से पहले ही शुरू हो चुका है मुकाबला
हालांकि औपचारिक उद्घाटन आज होगा, लेकिन एशियाई खेलों की कुछ प्रतियोगिताएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। फुटबॉल, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल सहित कुछ खेलों के मुकाबले उद्घाटन समारोह से पहले शुरू किए गए हैं। इसलिए 19 सितंबर का दिन औपचारिक उद्घाटन का दिन है, न कि सभी खेलों की शुरुआत का पहला दिन।
अब निगाहें उद्घाटन समारोह से आगे भारत के पदक अभियान पर होंगी। हांगझोउ में 107 पदकों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद भारतीय दल के सामने इस बार चुनौती केवल पदकों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि अलग परिस्थितियों में उस स्तर का प्रदर्शन दोहराने की भी है। एक तरफ नीरज चोपड़ा जैसे प्रमुख खिलाड़ी की अनुपस्थिति है, तो दूसरी तरफ मनु भाकर, तजिंदरपाल तूर, पीवी सिंधु, मीराबाई चानू और भारतीय टीम खेलों के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।
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