सच्चिदानंद जोशी की किताब ‘Low-Hanging Fruits’ का इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ विमोचन

जीवन की असली सुगंध रोज़मर्रा के छोटे-छोटे पलों में निहित है। अक्सर बड़ी चीज़ों की तलाश में हम उन छोटी-छोटी खुशियों को अनदेखा कर देते हैं, जो वास्तव में जीवन को सार्थक बनाती हैं।

Written By : आकृति पाण्डेय | Updated on: October 5, 2024 9:13 pm

लेकिन यह एक कवि और लेखक का हृदय ही है, जो इन छोटे-छोटे पलों के महत्व को सही मायने में समझ सकता है। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र(Indira Gandhi National Centre for the Arts) (आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी (Sachchidanand Joshi)  की पुस्तक ‘लो हैंगिंग फ्रूट्स’(Low-Hanging Fruits) जीवन में ऐसे ही छोटे-छोटे पलों की सार्थकता को बयां करती है। इस पुस्तक का लोकार्पण नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया गया। पुस्तक का लोकार्पण दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल प्रो. नजीब जंग, प्रसिद्ध लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता लेडी किश्वर देसाई और एस.जी.टी. यूनिवर्सिटी के डॉ. मदन मोहन चतुर्वेदी ने किया।

 

‘लो हैंगिंग फ्रूट्स’(Low-Hanging Fruits) जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं से सुवासित लघु कथाओं का आकर्षक संग्रह है। एसजीटी यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक का संपादन रूमी मलिक ने किया है। यह पुस्तक हास्य और चिंतन के सुंदर मेल के साथ रोजमर्रा की जिंदगी की सुक्ष्मताओं पर प्रकाश डालती है। पुस्तक के विमोचन के अवसर पर कला और साहित्य क्षेत्र की कई हस्तियां उपस्थित थीं।

डॉ.सच्चिदानंद जोशी ने  क्या बताया

सुप्रसिद्ध कथाकार ‘पद्म श्री’ मालती जोशी (Malti Joshi) के पुत्र डॉ. सच्चिदानंद जोशी (Sachchidanand Joshi)  ने बताया कि स्टोरीटेलिंग (Storytelling) उनके पालन-पोषण का एक स्वाभाविक हिस्सा था। उनका नवीनतम संग्रह ‘लो हैंगिंग फ्रूट्स’(Low-Hanging Fruits) जीवन के उन सरल सुखों और घटनाओं से उपजा है, जिन्हें अक्सर लोग रोजमर्रा की हलचल में अनदेखा कर देते हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक उनके दिल से निकली है। यह पुस्तक उन्होंने अपने अंग्रेजी शिक्षक कमालुद्दीन निज़ामी को समर्पित की है, जिन्होंने भाषा पर उनके नियंत्रण पर एक स्थायी प्रभाव डाला। डॉ. जोशी ने बताया कि जब उन्होंने पुस्तक सबसे पहले अपनी मां मालती जोशी को भेंट की, तो मां ने कहा कि इसे अच्छे से लॉन्च करना।

पुस्तक की लेखन शैली पर टिप्पणी करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि ‘लो हैंगिंग फ्रूट’ पारम्परिक रूप से न तो यात्रा वृत्तांत है, न संस्मरण है और न ही कथा-साहित्य है, बल्कि यह सबका मिश्रण है। उनकी कहानियां वास्तविक जीवन के अवलोकनों पर आधारित हैं, जो महत्वहीन लगने वाले क्षणों को विचारोत्तेजक आख्यान में बदल देती हैं। ‘सिज़लिंग समोसे’ जैसी रचना पाठक को जीवन का रसास्वादन कराती है, जो विशिष्ट हास्य और गहराई से परिपूर्ण है।

संस्कृति मंत्रालय में अपनी ढेर सारी जिम्मेदारियों और व्यस्तता के बावजूद, डॉ. जोशी की सांसारिकता में सौंदर्य को पकड़ने की क्षमता ‘लो हैंगिंग फ्रूट्स’(Low-Hanging Fruits) को एक भावपूर्ण संग्रह बनाती है। यह पुस्तक मानवीय अनुभव के बारे में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करते हुए आम पाठक से बहुत सहजता जुड़ती है और संवाद करती है।

लेडी किश्वर देसाई ने किताब की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसमें जीवन की कई बारीकियों को गहनता से दर्शाया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. जोशी जन्मजात कहानीकार हैं, उनकी तीक्ष्ण स्मरण शक्ति उन्हें सूक्ष्म विवरणों को स्मरण करने तथा उनकी पुनर्रचना करने में सक्षम बनाती है, जिन्हें अन्य लोग अनदेखा कर देते हैं। किश्वर देसाई ने उनकी छोटी कहानियों की तुलना ‘तीन पन्नों में पूरी दुनिया’ से की। उन्होंने कहा कि ‘लो हैंगिंग फ्रूट’ पाठकों को अपने अंदर और आसपास की दुनिया से परिचित कराता है।

श्री नजीब जंग ने पुस्तक पर बात करते हुए डॉ. जोशी की इस बात के लिए सराहना की, कि पुस्तक में चरित्र की मजबूती और गहन अवलोकन का सुंदर संयोजन है। उन्होंने कहा कि द्विभाषी होना एक दुर्लभ कौशल है और डॉ. जोशी की अंग्रेजी तथा हिंदी दोनों में सहजता से लिखने की दक्षता एक विलक्षण उपलब्धि है। उन्होंने डॉ. जोशी से आग्रह किया कि वे लंबी कहानियां लिखने पर विचार करें।

कार्यक्रम के अंत में, श्रीमती मालविका जोशी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और आयोजन को यादगार बनाने के लिए प्रकाशक तथा सम्मानित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. जोशी के रचनाकर्म में आईजीएनसीए परिवार के सहयोग को स्वीकार किया और उम्मीद जताई कि पाठकों द्वारा ‘लो हैंगिंग फ्रूट्स’(Low-Hanging Fruits) का गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा।

 

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