लघुकथा-संग्रह ’21वीं सदी की लघुकथाएँ’ का हुआ लोकार्पण

चर्चित कवि-कथाकार सिद्धेश्वर द्वारा संपादित देश के अनेक चर्चित लघुकथाकारों की 250 लघुकथाओं के संग्रह '२१वीं सदी की लघुकथाएँ' का लोकार्पण गुरुवार की संध्या बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में संपन्न हुआ।

पुस्तक का लोकार्पण करते बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ एवं अन्य साहित्यकार
Written By : डेस्क | Updated on: July 24, 2025 10:27 pm

इस संग्रह में सिद्धेश्वर और पुस्तक की सह-संपादक ऋचा वर्मा, भगवती प्रसाद द्विवेदी, राम यतन यादव, डा कमल चोपड़ा, योगेन्द्र नाथ शुक्ल समेत देश भर के कुल 225 कथाकारों की लघुकथाएँ संकलित हैं।

लोकार्पण-समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि लघुकथाएँ सुई की भाँति पाठक-मन पर तत्काल प्रभाव डालती हैं। इसके शिल्प और गठन में ही इसका सार तत्त्व छुपा रहता है। समय-अल्पता के इस काल में लम्बी कथाओं और उपन्यासों को पढ़ने का समय नहीं निकाल पाने वाले पाठकों के लिए यह विधा अत्यंत रुचिकर सिद्ध हुई है। इस विधा में सक्षम कथाकार कम शब्दों में दीर्घकालीन प्रभाव छोड़ जाते हैं। साहित्य की यह विधा अत्यंत लोकप्रिय हो रही है।

पुस्तक का लोकार्पण करते हुए, सुप्रसिद्ध साहित्यकार और सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि इन दिनों साहित्य की लघुकथा विधा में बहुत कार्य हो रहे हैं और संग्रहों के प्रकाशन भी हो रहे हैं। किंतु अपनी विशिष्टताओं के कारण यह पुस्तक अपना विशेष स्थान रखती है। इसमें एक खंड समालोचनात्मक आलेख के हैं, जिससे लघुकथा को शास्त्रीय रूप में समझने में पाठकों को सहायता प्राप्त होगी।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए पुस्तक के संपादक सिद्धेश्वर ने कहा कि इस सदी की श्रेष्ठ लघुकथाओं का संकलन एक दुष्कर कार्य था। इसके संकलन और प्रकाशन में 8 वर्ष लगे। यह संकलन आने वाले लघुकथाकारों के लिए एक अनिवार्य पठनीय है।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा शशि भूषण सिंह, मधुरेश नारायण, डा मीना कुमारी परिहार, विद्या चौधरी, कुमार अनुपम, डा समरेन्द्र नारायण आर्य,राजप्रिया रानी, अश्विनी कविराज और कृष्णरंजन सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। पुस्तक की सह-संपादक डा ऋचा वर्मा ने धन्यवाद-ज्ञापन किया।

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