JPSC परीक्षा में धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन जारी, दूसरे दौर की वार्ता भी बेनतीजा

झारखंड की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने और CBI जांच की मांग पर अभ्यर्थी अड़े हुए हैं। CID की जांच में अब तक 14 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। पूर्व JPSC अध्यक्ष से पूछताछ हो चुकी है और तीन पूर्व सदस्यों को समन भेजा गया है।

Written By : रामनाथ राजेश | Updated on: August 9, 2026 12:07 am

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच शनिवार को दूसरे दौर की बातचीत हुई, लेकिन परीक्षा रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने समेत प्रमुख मांगों पर कोई सहमति नहीं बन सकी। छात्रों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

आंदोलनकारी छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च और घेराव की चेतावनी दी है। सरकार की ओर से मांगों पर मुख्यमंत्री के स्तर पर विचार कर निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है। रविवार को छात्रों के साथ एक और दौर की बातचीत प्रस्तावित है।

19 अप्रैल को हुई थी परीक्षा

विवाद 19 अप्रैल 2026 को हुई 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के बाद सामने आया। परीक्षा 103 पदों पर नियुक्ति के लिए हुई थी। 2 जुलाई को घोषित परिणाम में 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया।

परिणाम आने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया और OMR शीट को लेकर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर एक कथित OMR शीट वायरल हुई, जिसमें अभ्यर्थी के करीब 48 प्रश्न हल करने के बावजूद प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने का दावा किया गया। हालांकि इस वायरल OMR शीट की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अभ्यर्थियों ने परिणाम में श्रेणीवार कटऑफ नहीं दिए जाने और मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

विवाद बढ़ने के बाद मामला CID की जांच के दायरे में आया। करीब 1,000 सफल अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट की प्रतियां CID को भेजी हैं। जांच एजेंसी इन प्रतियों का मूल OMR शीट से मिलान कर रही है।

परीक्षा एजेंसी भी जांच के घेरे में

जांच में परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की भूमिका भी जांच के घेरे में है। एजेंसी के चयन और उसकी पूर्व पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठे हैं। CID इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि परीक्षा से जुड़े लोगों के बीच कोई आपसी सांठगांठ या अनियमितता थी या नहीं।

जांच के दौरान गोड्डा के ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी की गिरफ्तारी हुई। CID के अनुसार वह सरकारी अधिकारी होने के साथ परीक्षा कराने वाली निजी कंपनी से भी जुड़ा था। जांच एजेंसी उसकी भूमिका और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े उसके कथित नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

14 लोग गिरफ्तार

मामले में CID की कार्रवाई लगातार आगे बढ़ी है। 31 जुलाई तक 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। इसके बाद तीन और गिरफ्तारियां हुईं। इस तरह अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 14 हो गई है।

जांच का दायरा अब JPSC के पूर्व अधिकारियों तक भी पहुंच चुका है। पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते से CID कई बार पूछताछ कर चुकी है। आयोग के तीन पूर्व सदस्यों को भी पूछताछ के लिए समन किया गया है। परीक्षा एजेंसी के चयन, उसके सत्यापन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े फैसलों के बारे में जांच एजेंसी जानकारी जुटा रही है।

विवाद के बीच एल. खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया। CID ने उनके आवास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य सामग्री जांच के लिए जब्त की थी। हालांकि किसी व्यक्ति से पूछताछ या किसी पद से इस्तीफा देना अपने आप में अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

JPSC के साथ JSSC की परीक्षाएं भी मुद्दा

रांची में चल रहा आंदोलन केवल 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित नहीं है। छात्र झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को भी आंदोलन का हिस्सा बना रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में बार-बार उठते सवालों ने अभ्यर्थियों का परीक्षा व्यवस्था से भरोसा कमजोर किया है।

छात्र 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने के साथ पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। आर्थिक अनियमितता सामने आने पर ED जांच की मांग भी की गई है। इसके अलावा भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, स्थायी परीक्षा कैलेंडर और OMR प्रक्रिया में बदलाव समेत कई मांगें रखी गई हैं।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

सरकार के साथ बातचीत शुरू होने के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। छात्रों का कहना है कि उन्हें जांच के आश्वासन से अधिक ठोस निर्णय चाहिए। दूसरी ओर सरकार बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही है।

छात्रों के विधानसभा मार्च और घेराव की घोषणा ने सरकार के सामने तत्काल राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर दी है। यदि रविवार की प्रस्तावित बातचीत में भी कोई समाधान नहीं निकलता है तो 10 अगस्त का आंदोलन इस पूरे विवाद को और बड़ा रूप दे सकता है।

फिलहाल JPSC परीक्षा विवाद की जांच CID कर रही है, गिरफ्तारियों का सिलसिला जारी है और सरकार तथा छात्रों के बीच बातचीत भी चल रही है। लेकिन परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर सहमति नहीं बनने के कारण रांची में छात्रों का आंदोलन थमने के बजाय और तेज होता दिखाई दे रहा है।

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