सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC नियमों पर कड़ी टिप्पणियाँ कीं। पीठ ने कहा कि नियम prima facie अस्पष्ट प्रतीत होते हैं और ये “capable of misuse” हैं, यानी इनके दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश वकीलों से सवाल किया कि क्या इन नियमों के जरिए “हम सामाजिक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं या पीछे की ओर जा रहे हैं ?” अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बनाए जाने वाले नियम स्पष्ट, संतुलित और दुरुपयोग से मुक्त होने चाहिए।
पीठ ने सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो इन प्रावधानों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई जा सकती है, ताकि नियमों को अधिक व्यावहारिक और निष्पक्ष बनाया जा सके।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों विनीत जिंदल और विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि नए नियमों का सेक्शन 3(सी) गैर-समावेशी है और यह सामान्य अथवा अनारक्षित श्रेणी के छात्रों और शिक्षकों को समान सुरक्षा का अधिकार नहीं देता। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) और 21 के विपरीत हैं और इससे शैक्षणिक संस्थानों में विभाजन और असंतुलन की स्थिति पैदा हो सकती है।
वहीं UGC और केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा अन्य सरकारी वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा कि इन नियमों का मूल उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना है और इन्हें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। हालांकि, अदालत ने इस दलील पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नियमों की भाषा फिलहाल पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं है और इसमें सुधार की आवश्यकता प्रतीत होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 के लिए निर्धारित की है। उस दिन दोनों पक्षों के विस्तृत तर्क सुने जाएंगे और नियमों में संभावित संशोधन या स्पष्टीकरण के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
नए नियमों के तहत प्रत्येक उच्च शिक्षा संस्थान में इक्विटी कमेटी और शिकायत निवारण की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था जाति-आधारित भेदभाव के मामलों में केवल SC, ST और OBC वर्गों को संरक्षण देती है, जबकि सामान्य श्रेणी को इससे बाहर रखती है, जो समानता के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है।
न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा कि नए नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके कुछ प्रावधान दुरुपयोग की आशंका पैदा करते हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि यदि इनका गलत तरीके से इस्तेमाल हुआ तो इससे शैक्षणिक परिसरों में सामाजिक तनाव और विभाजन बढ़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने एहतियातन इन नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगाना उचित समझा।
UGC ने हाल ही में 2026 के लिए नए समानता विनियम अधिसूचित किए थे, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव की शिकायतों के निपटारे के लिए एक नई संरचना और प्रक्रिया तय करना बताया गया था। हालांकि विभिन्न शिक्षाविदों, संगठनों और व्यक्तियों ने इन नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि नियमों में झूठी शिकायतों पर कार्रवाई की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है, अधिकारों और दायित्वों का संतुलन नहीं साधा गया है और इससे अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
लोग इस फैसले को शिक्षा नीति पर सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं।इस फैसले को सरकार और UGC के लिए तत्काल झटका बताया है। कुछ रिपोर्टों में अदालत की टिप्पणी को प्रमुखता दी गई कि नियम “समाज को बांटने का माध्यम बन सकते हैं”।
शिक्षा से जुड़े मंचों पर इसे नियमों की पुनर्समीक्षा का अवसर माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि वह इस मामले में नियमों के प्रत्येक प्रावधान की संवैधानिक कसौटी पर गहन जांच करेगा। अगली सुनवाई तक देश भर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 2012 के मौजूदा UGC विनियम ही लागू रहेंगे।
ये भी देखें :-
ये भी पढ़ें :-भारतीय भाषाएं एक दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन
**neuro sharp**
Neuro Sharp is an advanced cognitive support formula designed to help you stay mentally sharp, focused, and confident throughout your day.
**prostafense reviews**
ProstAfense is a premium, doctor-crafted supplement formulated to maintain optimal prostate function, enhance urinary performance, and support overall male wellness.
**boostaro official**
Boostaro is a purpose-built wellness formula created for men who want to strengthen vitality, confidence, and everyday performance.
**back biome official**
Mitolyn is a carefully developed, plant-based formula created to help support metabolic efficiency and encourage healthy, lasting weight management.