जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले पर सुप्रीम कोर्ट का बयान, ‘अफवाहों से कोई लेना-देना नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले का किसी भी अफवाह या कथित घटना से कोई लेना-देना नहीं है।

Written By : MD TANZEEM EQBAL | Updated on: March 22, 2025 11:10 pm

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (21 मार्च 2025) को बयान जारी कर कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले को लेकर गलत जानकारी और अफवाहें फैलाई जा रही हैं।

यह बयान टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि न्यायाधीश वर्मा के सरकारी आवास में आग लगने के बाद “बड़ी मात्रा में नकदी” बरामद हुई थी। इसके बाद, कई ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म ने भी इस रिपोर्ट को आधार बनाकर खबरें प्रकाशित कीं।

सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक बयान:

  • जस्टिस यशवंत वर्मा का ट्रांसफर सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की प्रक्रिया के अनुसार किया जा रहा है।
  • इसका कथित “घटना” या किसी भी तरह की अफवाहों से कोई संबंध नहीं है।
  • उनका ट्रांसफर उनके मूल हाईकोर्ट, यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया जा रहा है, जहां उनकी सीनियरिटी 9वीं होगी।
  • कोलेजियम इस प्रस्ताव पर दिल्ली और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और अन्य जजों की राय लेने के बाद अंतिम निर्णय लेगा।

दिल्ली हाईकोर्ट में आंतरिक जांच जारी

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय ने इस मामले में पहले ही आंतरिक जांच शुरू कर दी थी।

  • यह जांच 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम की बैठक से पहले ही शुरू की गई थी।
  • इसकी रिपोर्ट 21 मार्च को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना को सौंप दी गई है।
  • रिपोर्ट गोपनीय रखी जाएगी, ताकि संबंधित जज की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा प्रभावित न हो।

जांच प्रक्रिया के चरण:

सुप्रीम कोर्ट ने 2015 के एक फैसले का हवाला देते हुए बताया कि किसी भी हाईकोर्ट के जज के खिलाफ जांच दो चरणों में होती है:

  1. पहला चरण – संबंधित हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश यह तय करते हैं कि लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है या नहीं और क्या विस्तृत जांच की जरूरत है।
  2. दूसरा चरण – यदि मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट में गहरी जांच की सिफारिश होती है, तो CJI एक तीन सदस्यीय समिति का गठन करते हैं, जिसमें दो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक हाईकोर्ट के जज शामिल होते हैं।

जस्टिस यशवंत वर्मा कौन हैं?

  • शिक्षा: 1992 में रीवा यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री।
  • कानूनी करियर:
    • 1992 में वकील के रूप में नामांकन।
    • संवैधानिक, औद्योगिक विवाद, कॉर्पोरेट, टैक्सेशन और पर्यावरण कानून में विशेषज्ञता।
    • 2006 से इलाहाबाद हाईकोर्ट के विशेष वकील के रूप में कार्य किया।
  • न्यायिक पद:
    • अक्टूबर 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति।
    • फरवरी 2016 में स्थायी जज बने।
    • अक्टूबर 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट में शपथ ली।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जस्टिस वर्मा के तबादले का “घटना” से कोई लेना-देना नहीं है और यह प्रक्रिया कोलेजियम की नियमित कार्यवाही के तहत की जा रही है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में एक आंतरिक जांच शुरू की थी, जिसकी रिपोर्ट CJI को सौंपी जा चुकी है। अब आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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3 thoughts on “जस्टिस यशवंत वर्मा के तबादले पर सुप्रीम कोर्ट का बयान, ‘अफवाहों से कोई लेना-देना नहीं’

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