नई व्यवस्था के तहत पात्र Person-to-Merchant यानी P2M भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के सामान्य मर्चेंट लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। यानी यह शुल्क मुख्य रूप से व्यापारी पक्ष से जुड़े भुगतान ढांचे में आएगा, न कि ग्राहक के UPI ऐप से सीधे काटा जाएगा।
सबसे अहम बात यह है कि 2,000 रुपये तक के पात्र UPI मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसी तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य Person-to-Person यानी P2P भुगतान पर भी इस बदलाव का असर नहीं होगा।
कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग MDR व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र भुगतान पर 5 रुपये MDR निर्धारित किया गया है।
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI अब भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की रीढ़ बन चुका है। अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24 अरब लेनदेन हुए और इनका कुल मूल्य लगभग 311 अरब डॉलर रहा।
यानी नई व्यवस्था का सीधा संदेश यह है—UPI पर आम आदमी के लिए कोई सामान्य चार्ज नहीं आया है, लेकिन बड़े मर्चेंट भुगतान की लागत व्यवस्था अब बदल रही है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि इस अतिरिक्त लागत को व्यापारी खुद वहन करते हैं या इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ता है।
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